Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच हुई मारपीट की घटना सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, इस घटना में असम का एक छात्र घायल हुआ था, जिसके बाद शुरुआती तौर पर इसकी तुलना उत्तराखंड में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा के साथ हुई घटना से की जाने लगी थी। हालांकि, पुलिस की जांच ने इस पूरे मामले को अलग ही दिशा दे दी है।
एमपी में असमिया स्टूडेंट पर हमला करने के आरोप में पांच गिरफ्तार (सांकेतिक फोटो)
अनूपपुर स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) में छात्रों के बीच हुई इस हिंसा को लेकर पहले काफी चर्चा हुई, लेकिन जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य उजागर हुए हैं, जिन्होंने शुरुआती दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के मुताबिक, यह घटना 13 जनवरी की सुबह लगभग 4 बजे की है। जांच में सामने आया है कि आरोपी छात्र अनुराग पांडे, जतिन सिंह, विशाल यादव और उनके दो अन्य साथी उस हॉस्टल के कमरे में पहुंचे, जहां वे पहले रह चुके थे। वर्तमान में उस कमरे में असम का छात्र हिरोश ज्योति दास रह रहा था। कमरे में पहुंचने के बाद आरोपियों और हिरोश ज्योति दास के बीच कहासुनी हुई, जो धीरे-धीरे हिंसक झड़प में बदल गई।
पुलिस अधीक्षक ने क्या बताया?
अनूपपुर के पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान ने इस मामले को लेकर स्पष्ट किया है कि यह घटना किसी पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा नहीं थी, बल्कि छात्रों के बीच हुई आपसी बहस के बाद हुई साधारण मारपीट थी। कुछ मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया पर इसे “नस्लीय हमला” बताकर पेश किया गया, लेकिन एसपी मोती उर रहमान ने ऐसे सभी दावों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने बताया कि घायल छात्र द्वारा दी गई शिकायत में कहीं भी नस्लीय टिप्पणी, भेदभावपूर्ण भाषा या अपमानजनक शब्दों का उल्लेख नहीं है। एसपी के अनुसार, विश्वविद्यालय में उत्तर-पूर्वी राज्यों से जुड़े करीब 25 छात्र अध्ययनरत हैं और अब तक वहां नस्लवाद से जुड़ी कोई भी शिकायत सामने नहीं आई है। पुलिस अधीक्षक ने दो टूक कहा कि यह मामला केवल छात्रों के बीच हुई सामान्य झड़प का है, जिसे गलत ढंग से पेश किया गया।
पांच छात्रों को किया गया निष्कासित
कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया था कि घायल छात्र की नाक टूट गई और उसे गंभीर चोटें पहुंचीं, लेकिन पुलिस की जांच में ऐसे दावे सही नहीं पाए गए। पुलिस का कहना है कि यह मामला दोनों पक्षों के बीच हुई सामान्य कहासुनी का परिणाम था। अनूपपुर के पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान ने स्पष्ट किया कि मेडिकल जांच रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की हड्डी टूटने की पुष्टि नहीं हुई है। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कदम उठाते हुए इसमें शामिल सभी पांच छात्रों को निष्कासित कर दिया। हालांकि, पुलिस की जांच अब भी जारी है।
मुख्य आरोपी अब भी फरार
विश्वविद्यालय के कई छात्रों का भी मानना है कि यह हॉस्टल में रहने के दौरान हुआ एक छोटा-सा विवाद था, जिसे अनावश्यक रूप से बड़ा रूप दे दिया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और तथ्य सामने लाने के लिए गहन जांच की जा रही है। गौरतलब है कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के रहने वाले छात्र एंजेल चकमा की निर्मम हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि हमलावरों ने उसे नस्लीय टिप्पणी करते हुए ‘चाइनीज मोमो’ कहकर बुलाया। जब चकमा ने इसका विरोध किया, तो आरोपियों ने उस पर चाकू से हमला कर उसकी जान ले ली। इस मामले में पुलिस अब तक पांच आरोपियों को हिरासत में ले चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी यज्ञराज अवस्थी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
