मानसून में भी प्यासी यमुना! हथिनीकुंड बैराज से कम पानी छोड़े जाने पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता

मानसून के दौरान हथिनीकुंड बैराज में पानी बढ़ने के बावजूद यमुना में पर्याप्त जल न छोड़े जाने पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे नदी की पारिस्थितिकी, प्रदूषण कम करने की क्षमता और बाढ़ क्षेत्र पर प्रभाव पड़ रहा है।

पिछले दो सप्ताह में मानसून की बारिश के कारण यमुना पर स्थित हथिनीकुंड बैराज में जलप्रवाह तो बढ़ा, लेकिन नदी में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा कई दिनों तक नहीं बढ़ाई गई। इससे दिल्ली के निचले हिस्से में यमुना की पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।

Yamuna delhi

दिल्ली में यमुना नदी (फाइल फोटो)

नहरों की ओर मोड़ा गया अतिरिक्त पानी

’साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रीवर्स एंड पीपुल’ (एसएएनडीआरपी) की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मानसून शुरू होने के बाद बैराज पर पानी की आवक लगातार बढ़ी, लेकिन अतिरिक्त पानी का अधिकांश हिस्सा पश्चिमी और पूर्वी यमुना नहरों में मोड़ दिया गया। नदी में केवल गर्मियों के दौरान छोड़े जाने वाले न्यूनतम स्तर का पानी ही छोड़ा जाता रहा।

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