रस्सी छोटी थी या बचाव टीम को था जान का डर? सिस्टम की लापरवाही ने छीन ली युवराज मेहता की सांस!

ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं। प्रशासन का कहना है कि गहरे और पानी से भरे गड्ढे तक पहुंचने के लिए रस्सियां, सीढ़ियां और अन्य उपकरण कम पड़ गए, साथ ही घने कोहरे और अंधेरे के कारण रेस्क्यू बेहद मुश्किल हो गया। वहीं, चश्मदीदों और परिजनों का आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिस और आपदा राहत टीमें ठंडे पानी और भीतर मौजूद मलबे के डर से गड्ढे में उतरने से कतराती रहीं।

ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई। हैरानी की बात यह रही कि युवराज करीब 90 मिनट तक जिंदा रहे, अपनी डूबती कार की छत पर खड़े होकर मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन समय पर प्रभावी रेस्क्यू नहीं हो सका। इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही, निर्माण स्थलों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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