प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को लिखी अपनी शिकायत में एक वन्यजीव कार्यकर्ता ने दावा किया है कि राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के मांसाहारी जीवों के खाने के लिए बिना आवश्यक अनुमति के जानवरों को बाहर से लाकर परिसर के भीतर ही काटा जा रहा है। उसने मांग की इस कथित गतिविधि और अन्य अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की जाए।
दिल्ली चिड़ियाघर (फाइल फोटो)
पीएमओ को इस महीने की शुरुआत में भेजी गई शिकायत में वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने आरोप लगाया, 'मांसाहारी जानवरों के लिए ताजे मांस की खरीद अधिकृत बूचड़खानों से सरकार द्वारा स्वीकृत निविदाओं के माध्यम से की जानी चाहिए थी, लेकिन सक्षम अधिकारियों की अनुमति के बिना कथित तौर पर 2024 से चिड़ियाघर परिसर के भीतर ही जानवरों को काटा जा रहा है।'
दिल्ली चिड़ियाघर के निदेशक ने इन आरोपों का खंडन किया
दिल्ली चिड़ियाघर के निदेशक संजीत कुमार ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि मांसाहारी जानवरों को दिए जाने वाले मांस की खरीद जेम (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) प्रक्रिया और निविदा प्रणाली के जरिए ही की जाती है। कार्यकर्ता की शिकायत में चिड़ियाघर के भीतर कथित रूप से जानवरों को काटने के मामले की विशेष रूप से जांच की मांग की गई है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या इसके लिए आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं और क्या उस स्थान पर निगरानी कैमरे लगे हुए थे।
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'दिल्ली चिड़ियाघर, मांस की आपूर्ति के लिए निविदा जारी करता है'
इस संबंध में एमसीडी (दिल्ली नगर निगम) ने भी कहा, 'दिल्ली चिड़ियाघर, मांस की आपूर्ति के लिए निविदा जारी करता है। ऐसे में जो भी आपूर्तिकर्ता उनकी शर्तों और नियमों को पूरा करता है, वह बूचड़खाने से प्राप्त करने के बाद भैंस या भेड़ और बकरी के मांस की आपूर्ति कर सकता है। हालांकि, चिड़ियाघर अपने परिसर के भीतर जानवरों को नहीं काटा जा सकता है।' कार्यकर्ता ने यह भी कहा कि उन्हें अपनी शिकायत के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय से पावती प्राप्त हुई है।
