Delhi Crime: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने फर्जी सरकारी पहचान पत्र बनाने और उन्हें ऑनलाइन बेचने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में बिदेशी साव और संतोष कुमार नाम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी bkprint.in नाम की वेबसाइट के जरिए पैसे लेकर फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे सरकारी दस्तावेज तैयार कर रहे थे। ये दस्तावेज देखने में बिल्कुल असली जैसे लगते थे और इनका इस्तेमाल पहचान छिपाने, धोखाधड़ी, बैंक फ्रॉड और दूसरे अपराधों में किया जा सकता था।
दिल्ली पुलिस ने पकड़ा बड़ा साइबर रैकेट (फोटो- Delhi Police)
कैसे मिली सूचना?
सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और साइबर पेट्रोलिंग के दौरान पुलिस को इस वेबसाइट की जानकारी मिली। इसकी जांच के लिए पुलिस ने एक डमी अकाउंट बनाया और वेबसाइट पर दिए गए UPI के जरिए 100 रुपये जमा किए। इसके बाद नकली जानकारी और फोटो डालकर फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी आसानी से तैयार हो गए। जांच में पता चला कि इन दस्तावेजों पर लगा QR कोड किसी सरकारी डेटाबेस से जुड़ा नहीं था, बल्कि उसमें वही जानकारी दिख रही थी जो वेबसाइट पर भर दी गई थी। इससे साफ हो गया कि वेबसाइट पूरी तरह फर्जी दस्तावेज तैयार कर रही थी।तकनीकी जांच के दौरान वेबसाइट से जुड़े मोबाइल नंबर और UPI अकाउंट का पता दमन और दीव निवासी बिदेशी साव तक पहुंचा। पूछताछ में उसने बताया कि वेबसाइट का तकनीकी काम और बैकएंड पटना निवासी संतोष कुमार संभालता था। इसके बाद पुलिस ने पटना में छापा मारकर संतोष कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया।
क्या था दोनों का रोल?
पुलिस के अनुसार, बिदेशी साव वेबसाइट चलाता था, ग्राहकों से ऑनलाइन पैसे लेता था और फर्जी दस्तावेज तैयार कर उपलब्ध कराता था।
वहीं संतोष कुमार ने bkprint.in और bkprint.xyz वेबसाइट का डिजाइन तैयार किया, सर्वर और डेटाबेस संभाला तथा ऐसा सिस्टम बनाया जिससे कोई भी मनचाही जानकारी भरकर फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार कर सकता था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, लैपटॉप, QR कोड साउंड बॉक्स, वेबसाइट का सोर्स कोड, ग्राहक डेटा, पेमेंट रिकॉर्ड, होस्टिंग से जुड़ी जानकारी और दोनों आरोपियों के बीच हुई चैट बरामद की है।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित साइबर गिरोह है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन जुड़े थे, कितने लोगों ने फर्जी दस्तावेज बनवाए और इनका इस्तेमाल किन-किन अपराधों में किया गया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के फर्जी सरकारी दस्तावेज बनवाने या इस्तेमाल करने से बचें और ऐसी संदिग्ध वेबसाइटों की तुरंत सूचना पुलिस को दें।
