Delhi News: दिल्ली में अभी गर्मी धीरे-धीरे अपने चरम की ओर बढ़ रही है। कुछ ही दिनों में सूरज से आग बरसने लगेगी और प्रचंड गर्मी से दिन में बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा और रात में सोना हराम। ऐसे में बाढ़ की बात करना थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यही वो समय है जब आने वाले मानसून के लिए तैयारी की जाती है। यही वह समय है, जब जुलाई से सितंबर तक होने वाली बारिश और उस दौरान आने वाली बाढ़ से निपटने की योजना बनाई जाती है। दिल्ली में मानसून की तैयारी के तहत यमुना किनारे कंक्रीट की फ्लड वॉल (Flood Wall) बनाने की तैयारी है। चलिए जानते हैं यह फ्लड वॉल कहां बनेगी और कुछ लोग इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
बाढ़ रोकने के लिए यमुना किनारे कंक्रीट की दीवार बनाने की योजना
दिल्ली में यमुना किनारे कहां बनाई जाएगी दीवार?
दिल्ली सरकार ने यमुना नदी के पश्चिमी तट पर 4.7 किमी लंबी कंक्रीट की एक दीवार बनाने की मंजूरी दे दी है। यह दीवार हर साल मानूसन के मौसम में यमुना में आने वाली बाढ़ से एक बड़े इलाके को बचाएगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि मजनू का टीला से लेकर पुराने रेलवे पुल तक यही दीवार बनाई जाएगी। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार की योजना इस दीवार का काम इस साल मानसून का मौसम आने से पहले ही पूरा करने की है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों का कहना है कि यह दीवार दिल्ली के एक बड़े इलाके को बाढ़ से स्थायी छुटकारा दिलाएगी। इस हिस्से में ऐतिहासिक रूप से बाढ़ आती रही है, जिसके चलते रिंग रोड और आसपास के इलाके जलमग्न हो जाते हैं।
जब पानी में डूब गया था सिविल लाइन्स इलाका
यह दीवार मानसून के दिनों में यमुना का पानी बढ़ने पर नदी किनारे दिल्ली के निचले इलाकों जैसे सिविल लाइन्स, कश्मीरी गेट और यमुना बाजार में पानी भरने से बचाएगी। यमुना में बाढ़ आने पर इन इलाकों में अक्सर कई फीट तक पानी भर जाता है। साल 1978, 2023 और 2025 में भी बाढ़ की ऐसी स्थिति देखी जा चुकी है। बाढ़ का पानी भरने से विशेष तौर पर दिल्ली के इन इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
मुख्यमंत्री दफ्तर के अनुसार यह दीवार न सिर्फ दिल्ली के इन निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से रोकेगी, बल्कि नदी नदी किनारे पानी के कारण होने वाले कटाव को रोकने में भी मददगार होगी। इसके साथ ही क्षेत्र में हो रहे अवैध कचरा निस्तारण पर भी लगाम लगाने में मददगार होगी। सरकार ने इस परियोजना के समर्थन में संयुक्त बाढ़ समिति और Central Water and Power Research Station की सिफारिशों का हवाला दिया है।
इतने फायदे तो दीवार बनाने का विरोध क्यों हो रहा है?
हालांकि, दिल्ली सरकार के इस फैसले पर पर्यावरण विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि नदी को उसके प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र से अलग करना यहां की पारिस्थितिकी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (SANDRP) के एसोसिएट कोऑर्डिनेटर भीम सिंह रावत का कहना है कि दिल्ली में यमुना के प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र में पहले ही काफी ज्यादा अतिक्रमण हो चुका है। उनका कहना है कि मजनू का टीला और तिब्बती कॉलोनी यमुना के बाढ़ क्षेत्र में ही बने हैं। उनका कहना है कि यमुना के बाढ़ क्षेत्र में दीवार बनाने से स्थिति और भी खराब हो सकती है। उनका मानना है कि सरकार को यहां स्थायी अतिक्रमण को हटाने की दिशा में काम करना चाहिए। उनका कहना है कि दीवार बनाने से स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो जाएगी और नुकसान भी काफी ज्यादा होंगे, विशेष तौर पर पूर्वी दिल्ली और दीवार से आगे के इलाकों में।
जानकार बाढ़ के लिए ITO बैराज को मान रहे जिम्मेदार
भीम सिंह का कहना है कि असली समस्या मौजूदा बैराजों का सही से और वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल नहीं होना है। वह कहते हैं कि बैराज और पुलों के कारण पहले ही नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव आ चुका है। अब प्राकृतिक बाढ़ क्षेत्र में दीवार बनाने से और ज्यादा नुकसान ही होगा। उनका तो यहां तक कहना है कि 2023 की बाढ़ के लिए ITO बैराज जिम्मेदार था, अगर इसका सही इस्तेमाल किया जाए तो बाढ़ न आए। वह कहते हैं कि इस बैराज का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है, इसको खत्म कर देना चाहिए, इससे नदी के इकोसिस्टम को फायदा मिलेगा और राजधानी में बाढ़ की समस्या भी कम हो जाएगी।
विशेषज्ञों ने दीवार बनाने से भूजल पर पड़ने वाले असर को लेकर चेताया है। उनका कहना है कि बाढ़ के पानी को उसके प्राकृतिक क्षेत्रों तक पहुंचने से रोकने पर जलभंडारों पर असर पड़ेगा। रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से कहा गया है कि अगर पानी वहां तक नहीं पहुंचा दो ग्राउंड वाटर रीचार्ज की प्रक्रिया बाधित होगी।
