Delhi News: राजधानी में कौशल विकास को प्रोत्साहित करने के लिए दिल्ली नगर निगम ने अपने अनुपयोगी सामुदायिक भवनों और स्कूलों को कौशल विकास केंद्रों में परिवर्तित करने का फैसला लिया है। शिक्षा के साथ छात्रों के कौशल विकास को बढ़ाने के लिए यह अहम फैसला लिया गया है। बता दें कि इसके साथ ही सामुदायिक भवनों और स्कूलों को कौशल विकास केंद्रों में बदलने की ये योजना निगम की आय में वृद्धि करने में भी सहायक होगी।
एमसीडी के स्कूलों में पढ़ाई के साथ अब होगा कौशल का विकास (फोटो - Wikipedia)
किराए से होगी एमसीडी की आय
जानकारी के अनुसार, एमसीडी के अनुपयोगी सामुदायिक भवनों और स्कूलों को स्वयंसेवी संगठनों (एनजीओ) और कौशल विकास संस्थाओं को किराए पर दिया जाएगा, जिससे निगम को आय प्राप्त होगी और स्थानीय लोगों को कौशल विकास की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही इस योजना में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, क्राफ्टमैन ट्रेनिंग स्कीम, वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम फॉर वूमेन और संकल्प योजना के तहत कार्यरत संस्थाओं को शामिल किया जाएगा।
दिल्ली में कितने अनुपयोगी भवन हैं?
इस योजना पर मंजूरी प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव को 8 अगस्त को होने वाली स्थायी समिति की बैठक में पेश किया जाएगा। दिल्ली में 299 सामुदायिक हॉल हैं, जिनमें से 122 अनुपयोगी हैं। इसके अलावा, निगम के पास 1185 स्कूल हैं, जिनमें से कुछ में पहली पारी के बाद कोई कक्षा नहीं होती। इन स्कूलों और सामुदायिक भवनों को दोपहर 3 बजे से रात 8 बजे तक किराए पर दिया जाएगा।
एक साल के लिए किराए पर दिए जाएंगे भवन
प्रारंभ में, सामुदायिक भवनों और स्कूलों को एक-एक वर्ष के लिए दिया जाएगा, और इसके बाद विस्तार की योजना बनाई जाएगी। इसके लिए विभिन्न समितियों का गठन किया जाएगा, जो संस्थाओं के कार्य का मूल्यांकन करेंगी। निगम को यह अधिकार होगा कि यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो वह अनुबंध को समाप्त कर सकता है।
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