दिल्ली हाई कोर्ट ने दीवानी मानहानि के एक मुकदमे में एलजी वीके सक्सेना (LG VK Saxena) के पक्ष में अंतरिम आदेश पारित की। उन्होंने अदालत से आप और उसके नेताओं को सोशल मीडिया (Social media) से कथित मानहानिकारक ट्वीट (Defamatory tweets) और अन्य पोस्ट हटाने का निर्देश देने का आग्रह किया था। दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) और उनके कई नेताओं को उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और उनके परिवार के खिलाफ 'झूठे' आरोप लगाने से रोक दिया, क्योंकि AAP ने दावा किया था कि वह 1,400 करोड़ रुपए के घोटाले में शामिल थे। न्यायमूर्ति अमित बंसल ने अंतरिम राहत पर आदेश सुनाते हुए कहा कि मैंने वादी के पक्ष में एक अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश पारित किया है।
इसके अलावा, सक्सेना ने AAP, उसके नेताओं आतिशी सिंह, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह और जैस्मीन शाह को भी हटाने का आदेश देने की मांग की है, जिन्हें दिल्ली सरकार ने डायलॉग एंड डेवलपमेंट कमीशन के वाइस चेयरपर्सन के रूप में नियुक्त किया था। सोशल मीडिया पर प्रसारित और जारी किए गए कथित झूठे और अपमानजनक पोस्ट या ट्वीट या वीडियो को हटा दें।
दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दीवानी मानहानि के एक मुकदमे में एलजी के पक्ष में अंतरिम रोक पारित करने के बाद दिल्ली एलजी वीके सक्सेना ने 'सत्यमेव जयते' ट्वीट किया।
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— ANI (@ANI) Sep 27, 2022
उन्होंने आम आदमी पार्टी और उसके पांच नेताओं से ब्याज समेत 2.5 करोड़ रुपए के हर्जाने और मुआवजे की भी मांग की है। आप नेताओं ने आरोप लगाया था कि खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान सक्सेना एक घोटाले में शामिल थे।
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