Delhi News: दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या न्यायिक व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, अदालतों में कुल 1.20 लाख से अधिक मामले अब भी लंबित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा रिट याचिकाएं, आपराधिक अपीलें और टैक्स से जुड़े मुकदमे शामिल हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट में 1.20 लाख से अधिक मामले पेंडिंग
जजों की कमी बढ़ा रही है मुश्किलें
न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाल ही में स्पष्ट किया कि न्यायाधीशों की कमी के कारण अदालतें कई मामलों की समय पर सुनवाई नहीं कर पा रही हैं। वर्तमान में दिल्ली हाई कोर्ट में स्वीकृत 60 न्यायाधीशों के मुकाबले केवल 35 कार्यरत हैं> अप्रैल और मई में तीन न्यायाधीशों का अन्य हाई कोर्टों में स्थानांतरण हुआ, जबकि दो वरिष्ठ न्यायाधीश सेवानिवृत्त हो गए। इससे अदालत पर दबाव और बढ़ गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने 26 मई को छह नए न्यायाधीशों के दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरण की सिफारिश की है, जिससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
एकीकृत कार्य योजना से होगा समाधान
लंबित मामलों की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने मई में तीन चरणों वाली एकीकृत कार्य योजना लागू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत 10, 20 और 30 वर्षों से लंबित मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। लक्ष्य है कि जून 2026 तक 20 वर्ष पुराने और मई 2027 तक 10 वर्ष पुराने सभी मामलों का निपटारा कर दिया जाए।
लंबित मामलों का ब्योरा
16 जून तक दर्ज आंकड़ों के अनुसार, 34,700 से अधिक रिट याचिकाएं, 34,400 आपराधिक अपीलें और 30,000 टैक्स से जुड़े मामले लंबित हैं। इन पर सुनवाई में तेजी लाना न्यायप्रणाली की प्राथमिकता बन गया है। दिल्ली हाई कोर्ट को अब न्यायिक नियुक्तियों की मंजूरी और बेहतर प्रबंधन की दरकार है, ताकि आम नागरिकों को समय पर न्याय मिल सके।
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