दिल्ली में होटल के पानी की चोरी पर लगेगी रोक; सीवेज में बहे पानी से तय होगा बिल

दिल्ली में होटलों, मॉल और अन्य बड़े व्यावसायिक संस्थानों पर पानी का बिल अब सीवेज में इस्तेमाल हुए पानी के आधार पर वसूला जाएगा। इन बड़े व्यावसायिक संस्थानों पर पानी की चोरी का आरोप है। जिसे रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। इस नीति के दायरे में सिर्फ आम नागरिक या गरीब लोग नहीं आएंगे। साथ ही इससे अवैध पानी कनेक्शन पर भी रोक लगेगी।

दिल्ली में पानी की चोरी पर लगाम लगाने के लिए सरकार अब सीवेज के आधार पर पानी का बिल तय करेगी। दरअसल दिल्ली में होटलों, बैंक्वेट हॉल, शॉपिंग मॉल और अन्य बड़े व्यावसायिक संस्थानों पर अवैध रूप से भूजल निकालने और टैंकरों से पानी चोरी करने के आरोप हैं। इस गंभीर समस्या पर चिंता जताते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। जिसके बाद दिल्ली सरकार ने बड़े व्यावसायिक संस्थानों से पानी का बिल सीवेज में बहे पानी के आधार पर वसूलने का फैसला किया है।

Water sewage

सांकेतिक फोटो

पानी की चोरी रोकने के लिए सरकार ने उठाए कदम

दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार, जल संयंत्रों से मिलने वाला पेयजल का लगभग 50 फीसदी हिस्सा चोरी हो जाता है, या लीकेज में लगभग बर्बाद हो रहा है। इस वजह से दिल्ली में जल संकट बढ़ रहा है। साथ ही इससे सरकार को राजस्व का भी भारी नुकसान हो रहा है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें पानी के टैंकरों के लिए जीपीएस लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा टैंकरों की निगरानी के लिए केंद्र भी बनाए गए हैं। जिसके बाद सरकार ने एक और बड़ा फैसला करते हुए सभी बड़े व्यावसायिक संस्थानों से सीवेज उत्पादन के आधार पर पानी का बिल तय करने का निर्णय लिया है। इसका मतलब ये है कि सीवर में जितना गंदा पानी बहेगा, उतने पानी की खपत मानकर बिल वसूला जाएगा।

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