Delhi Firecracker Ban: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को ऐलान किया कि उनकी सरकार इस दिवाली पर राजधानी में ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिवाली देश के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है और करोड़ों लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार इस मुद्दे को न्यायालय के सामने रखेगी।
ग्रीन पटाखों से रोक हटाने के लिए कोर्ट का रुख करेगी रेखा गुप्ता सरकार (स्क्रीनग्रैब: @gupta_rekha)
सुप्रीम कोर्ट में पेश होगा दिल्ली सरकार का पक्ष
रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट में लिखित रूप से अपना पक्ष रखेगी। सरकार का तर्क है कि यदि सर्टिफाइड ग्रीन पटाखों के इस्तेमाल की अनुमति दी जाती है, तो दिवाली का पारंपरिक उत्सव भी जारी रहेगा और प्रदूषण को भी नियंत्रित किया जा सकेगा। सरकार न्यायालय से यह भी अनुरोध करेगी कि नियमों के प्रभावी तरीके से लागू करने, जनभागीदारी सुनिश्चित करने और ग्रीन पटाखों की पहचान के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
2018 में लगी थी पटाखों पर रोक
दिल्ली में पटाखों पर रोक की शुरुआत वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से हुई थी। दरअसल, हर साल दिवाली के बाद राष्ट्रीय राजधानी की हवा खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो जाती थी। अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक पर विचार शुरू किया और वायु गुणवत्ता पर इसके प्रभाव की जांच करवाई। इसके बाद वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने पारंपरिक पटाखों पर रोक लगा दी और केवल “ग्रीन पटाखों”, यानी कम प्रदूषण वाले प्रमाणित पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की छूट दी।
2020 से फिर बदली नीति
साव 2020 से दिल्ली सरकार ने और सख्त रुख अपनाया। सर्दियों में प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए सभी प्रकार के पटाखों यहां तक कि ग्रीन पटाखों के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। यह प्रतिबंध आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर में घोषित किया जाता है और अगले साल 1 जनवरी तक लागू रहता है। सरकार का कहना है कि ग्रीन और पारंपरिक पटाखों में फर्क करना जमीनी स्तर पर बेहद मुश्किल था, इसलिए पूरा प्रतिबंध ही एकमात्र विकल्प बन गया।
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