Delhi: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा में विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। सीएजी (CAG) की रिपोर्ट के हवाले से उन्होंने दावा किया कि पिछली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने केंद्र से मिली 4800 करोड़ रुपये की ग्रांट का बड़ा हिस्सा फ्री बिजली और बस सेवा में खर्च कर दिया और अस्पताल, स्कूल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास को नजरअंदाज कर दिया गया।
CAG रिपोर्ट के हवाले से पिछली सरकार पर साधा निशाना
"विकास नहीं, सिर्फ वोटबैंक की राजनीति"
मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछली सरकार ने जनता के टैक्स के पैसे को मुफ्त योजनाओं और प्रचार में उड़ाया। केंद्र सरकार की ओर से मिले 4800 करोड़ रुपये में से 3250 करोड़ रुपये फ्री बिजली में खर्च कर दिए गए, लेकिन 24 प्रस्तावित नए अस्पताल अब तक अधूरे हैं, जिनकी लागत 2700 करोड़ रुपये बढ़ गई है।” उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने ‘प्रधानमंत्री’ नाम वाली योजनाओं को जानबूझकर रोक दिया और पीएम श्री स्कूल, पीएम विश्वकर्मा योजना, और आयुष मिशन जैसी केंद्रीय योजनाओं के लिए मिले फंड का भी सही इस्तेमाल नहीं किया।
CAG रिपोर्ट में हुए खुलासे
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, 3760 करोड़ की ग्रांट का उपयोग नहीं हुआ और राज्य सरकार ने उसका हिसाब भी नहीं दिया। 842 करोड़ रुपये मार्च 2024 तक बिना खर्च के पड़े रहे। 24 अस्पताल अधूरे हैं और लागत में 2700 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी भी हो गई है। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़कों पर 40% तक की कटौती हुई है।
प्रचार-प्रसार पर करोड़ों हुए खर्च
सीएम गुप्ता ने कहा, “शहरी विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे आवश्यक क्षेत्रों में भारी गिरावट आई है, लेकिन प्रचार-प्रसार पर करोड़ों खर्च किए गए। यह जनता के साथ विश्वासघात है।” उन्होंने मांग की कि सीएजी रिपोर्ट की जांच लोक लेखा समिति (PAC) को सौंपी जाए ताकि यह साफ हो सके कि जनता के पैसे का दुरुपयोग कहां-कहां हुआ।
राजनीतिक माहौल गरमाया
मुख्यमंत्री के इन आरोपों के बाद विधानसभा में विपक्षी दलों ने हंगामा किया, जबकि भाजपा विधायकों ने सीएजी रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर AAP नेतृत्व से जवाब मांगा। राजनीतिक हलकों में अब यह बहस तेज हो गई है कि मुफ्त योजनाएं सामाजिक कल्याण हैं या राजनीतिक हथियार।
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