Amritansh story: शब्दों से यारी में वक्त लगा, उसने रंगों को शब्दों में ढाल दिया

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Mar 31, 2023, 01:39 PM IST

कहते हैं कि प्रतिभा किसी बाधा की मोहताज नहीं होती। अगर आप ठान लें तो मुश्किलें खुद ब खुद रास्ता बन जाती हैं और आप उस रास्ते पर चलकर मंजिल पर पहुंच सकते हैं। वैसे तो यह कहानी 14 साल के लड़के अमृतांश की है। लेकिन प्रेरणा उन लाखों करोड़ों लोगों के लिए है जो हमेशा लाचारी का जिक्र करते रहते हैं।

Amritansh story: अमृतांश 14 साल का है। एक ऐसा बच्चा, जो न्यूरो-डायवर्जेंट है जिसे हमारी दुनिया से तालमेल बिठाने में दिक्कत होती है। ऐसे बच्चों को हम ऑटिस्टिक भी कहते हैं, अपने अज्ञान में कई और नाम भी देते हैं। समझिए, तो अमृतांश के स्नायु-तंत्र (न्यूरल सिस्टम) में कुछ ऐसी बात है कि वह किसी भी सामान्य परिस्थिति में अधिक चुनौतियों का सामना करता है। जैसे, वह अब भी संचार के लिए शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर पाता या किसी नए वातावरण में वह उद्विग्न (एन्ग्जाएटी) हो जाता है। हालांकि, इससे उसकी उड़ान नहीं थमी। वह अपने दैनिक काम खुद कर लेता है और अपने चारों ओर खुशियां ही बिखेरता है।

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अमृतांश

कैनवास उसका कीमियागर बना

रंगों और आकारों (शेप्स) को समझाने के लिए अमृतांश को कला की दुनिया से परिचित कराया गया, ताकि वह 1 से 10 और अ से ज्ञ सीखने की अपनी बोर दिनचर्या में कुछ रंग भर सके। वह हालांकि, दुनियावी चीजें अभी भी सीखने में पीछे है लेकिन कला के विभिन्न स्वरूपों ने उसे उसके आत्म से मिलवाया है। वह अधिक देर तक बैठता है और उसका ध्यान भी केंद्रित रहता है। रंगों से उसकी दोस्ती हुई, कैनवास उसका कीमियागर (केमिस्ट) बना और लो...हो गया चमत्कार। गुमसुम अमृतांश अब खुलकर खेलता है। वह रंगों की अपनी दुनिया में मस्ती से घूमता है और हमसे उसका संवाद इसलिए बेहतर हुआ है। उसकी पेंटिग्स हमने लोगों को जब दिखाई तो लोग जमकर वाह-वाह बोले।

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