JNU Controversy: दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्रों ने कुलपति शांतिश्री डी पंडित (Santishree D Pandit) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उनके इस्तीफे की मांग की। दरअसल, छात्रसंघ (JNUSU) के नेतृत्व में 400-500 छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। बता दें कि, छात्रसंघ के प्रस्तावित मार्च को दिल्ली पुलिस ने शिक्षा मंत्रालय तक जाने की इजाजत नहीं दी और परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
जेएनयू में फिर बवाल
हिरासत में लिए गए छात्र
दिल्ली पुलिस ने जेएनयू के मेन गेट पर ताला लगातार उसके चारों ओर बैरिकेडिंग कर छात्रों को जाने से रोका। ऐसे में छात्रों ने पत्थरों से ताले तोड़ने और बैरिकेड पार करने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान झड़प भी हुई। हालात को बिगड़ता देख पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में ले लिया।
JNU में क्यों बरपा हंगामा?
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, छात्रों का आरोप है कि कुलपति ने 16 फरवरी को प्रकाशित एक पॉडकास्ट में दलितों और अश्वेत समुदाय को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसको लेकर छात्र उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और अपनी शिकायतें शिक्षा मंत्रालय तक पहुंचाना चाहते थे। हालांकि, पुलिस ने छात्रों को शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालने की इजाजत नहीं दी।
JNU के दरवाजे पर लगाया गया ताला
छात्रों ने जेएनयू के साबरमती टी-प्वाइंट से शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकालने की योजना बनाई थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय के गेट पर ताला जड़ दिया और उसके बाहर बैरिकेडिंग लगा दी। प्रदर्शनकारी छात्रों में जेएनयू छात्रसंघ के अलावा AISF, SFI, PDSU और NSUI जैसे वामपंथी छात्र संगठन शामिल थे। इस दौरान, छात्रों ने बीआर अंबेडकर के पोस्टर और झंडे लेकर मुख्य द्वार को पार करने की कोशिश की।
JNU प्रशासन की छात्रों को सलाह
जेएनयू प्रशासन ने छात्रों से कैंपस के अंदर रहने की सलाह देते हुए कहा था कि कैंपस के बाहर प्रदर्शन की कोई अनुमति नहीं है। लगातार बातचीत और अनुरोध के बावजूद, गुरुवार दोपहर करीब 3:20 बजे मुख्य गेट से लगभग 400-500 छात्र बाहर निकलकर प्रदर्शन मार्च पर निकल पड़े। इस दौरान, छात्रों और पुलिस कर्मियों के बीच हिंसक झड़प भी हुई, जबकि हिरासत में लिए गए छात्रों ने विश्वविद्यालय गेट बंद करने, पुलिस कार्रवाई और अपने विरोध के अधिकार को दबाने का आरोप लगाया।
