Malviya Nagar Fire: दिल्ली के मालवीय नगर में 3 जून बुधवार की सुबह 'फ्लॉरिश स्टे बीएंडबी' (Flourish Stay B&B) गेस्ट हाउस में लगी भीषण आग ने पूरी राजधानी को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में 12 विदेशी नागरिकों समेत 21 लोगों की मौत हो गई। लेकिन इस भयानक त्रासदी के बीच दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के कुछ जांबाज जवानों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए फरिश्ते की तरह एंट्री ली और कम से कम 58 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
मालवीय नगर अग्निकांड में दिल्ली पुलिस की बहादुरी
बिना किसी सुरक्षा उपकरण या फायर सूट के धधकती इमारत में घुसने वाले इन जवानों ने उस खौफनाक मंजर को याद किया है। हादसे की खबर मिलते ही पास की कुमार बस्ती में तैनात हेड कांस्टेबल दिनेश, देशराज, राजवीर और करतार सबसे पहले मौके पर पहुंचे। दिनेश ने बताया, "जब मैं वहां पहुंचा, तो पूरी पांच मंजिला इमारत काले धुएं के गुबार से घिरी हुई थी। मुख्य रास्ता पूरी तरह आग की लपटों की चपेट में था। ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग खिड़कियों से हाथ हिलाकर मदद के लिए चीख रहे थे।"
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हथौड़े से तोड़े शीशे
फायर ब्रिगेड और सुरक्षा उपकरणों का इंतजार किए बिना दिनेश ने स्थानीय लोगों की मदद से एक सीढ़ी का इंतजाम किया और दूसरी मंजिल पर चढ़ गए। उन्होंने हथौड़े से खिड़कियों के कांच तोड़े ताकि कमरों में भरा दमघोंटू धुआं बाहर निकल सके। इस दौरान कांच लगने से उनके सिर, हाथ और पैरों में गंभीर चोटें आईं और वे झुलस भी गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। दिनेश एक खिड़की से अंदर घुसे और कमरे में फंसी दो महिलाओं को सुरक्षित बाहर निकाला।
अपनी जान पर आए खतरे को याद करते हुए दिनेश ने कहा, "एक पल ऐसा आया जब मुझे लगा कि मैं खुद जिंदा नहीं बचूंगा। अगर मैं अंदर 15 सेकंड और रुक जाता, तो मौत तय थी। मेरे नीचे उतरने के ठीक 10 सेकंड बाद खिड़की के पास बिजली के तारों में भयंकर ब्लास्ट हुआ और आग लग गई।"
फंसे लोगों को निकालने के लिए जमीन पर बिछाए गद्दे
हालात बिगड़ते देख हेड कांस्टेबल देशराज और अन्य जवानों ने सूझबूझ दिखाई। जब ऊपर फंसे लोगों के निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा, तो पुलिसकर्मियों ने पास की दुकानों से गद्दे मंगवाए और उन्हें जमीन पर बिछा दिया। देशराज ने बताया, "हम नीचे से चिल्ला रहे थे कि डरो मत, बस गद्दों पर कूद जाओ। कई लोग दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल से नीचे कूदे। उन्हें चोटें जरूर आईं, लेकिन उनकी जान बच गई।" जवानों ने बताया कि इलाके की संकरी गलियों और तमाशबीन भीड़ की वजह से एम्बुलेंस को मौके पर पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
इन जवानों ने दर्जनों जिंदगियां बचाईं, लेकिन आज भी उनके मन में एक गहरा दर्द और मलाल छिपा है। जवानों ने भावुक होते हुए कहा, "हमें इस बात का हमेशा अफसोस रहेगा कि हम और लोगों को नहीं बचा सके। हम बेबस थे, क्योंकि अंदर से लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाजें लगातार आ रही थीं, लेकिन बिना उपकरणों के हमारी भी एक सीमा थी। हमने अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन जिन 21 लोगों की जान चली गई, उसकी टीस हमेशा हमारे दिलों में रहेगी।"
