मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती (Rajendra Bharti) को धोखाधड़ी के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को इसकी पुष्टि की। विधानसभा सचिवालय ने गुरुवार रात इस मामले पर विचार-विमर्श के बाद दतिया सीट से उनकी सदस्यता समाप्त करने की अधिसूचना जारी कर दी।
कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द (फोटो- Rajendrabhartiinc)
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क्यों गई राजेंद्र भारती की सदस्यता?
अधिसूचना में दिल्ली की एक अदालत द्वारा उन्हें तीन साल की सजा सुनाए जाने का हवाला देते हुए सीट को रिक्त घोषित किया गया है। यह आदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने दो अप्रैल की रात जारी किया, जिसे शुक्रवार सुबह सार्वजनिक किया गया। राजेंद्र भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में पूर्व गृह मंत्री और भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था।
राजेंद्र भारती के खिलाफ कोर्ट का फैसला
दिल्ली की अदालत ने गुरुवार को भारती और बैंक के एक पूर्व कर्मचारी को 1998 से 2011 के बीच बैंक रिकॉर्ड में हेरफेर कर अवैध रूप से ब्याज प्राप्त करने के मामले में तीन साल के कारावास की सजा सुनाई थी। विशेष न्यायाधीश Dig Vinay Singh ने दोनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने दोनों को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों का उपयोग करने जैसे गंभीर आरोपों में दोषी पाया। यह मामला मूल रूप से दतिया का था, जिसे निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए पिछले वर्ष अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि भारती द्वारा लगाया गया राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप केवल अनुमान था और इसे साबित नहीं किया जा सका।
राजेंद्र भारती ने खिलाफ क्या था मामला?
अभियोजन के अनुसार, यह मामला 1998 में दतिया स्थित जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में उनकी मां सावित्री देवी द्वारा कराई गई 10 लाख रुपये की सावधि जमा (एफडी) से जुड़ा है। आरोप है कि रिकॉर्ड में हेरफेर कर एफडी की अवधि बढ़ाई गई और 2011 तक अधिक ब्याज निकाला गया, जिससे करीब 18.5 लाख रुपये का अवैध लाभ हासिल किया गया। अदालत ने माना कि उस समय बैंक के अध्यक्ष रहे भारती ने अपने पद का दुरुपयोग कर कर्मचारियों पर दबाव बनाया और भुगतान संभव कराया। मामले में सावित्री देवी के खिलाफ कार्रवाई उनके 2019 में निधन के बाद समाप्त कर दी गई थी।
