बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में राज्य सरकार ने न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज से पूरे घटनाक्रम की जांच कराने का निर्देश दिया है। वहीं,इससे पहले प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए शाहपुर थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
एनकाउंटर को लेकर इलाके में तनाव
एनकाउंटर के बाद बिलौटी गांव में परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने भरत तिवारी का शव आरा-बक्सर एनएच-922 पर रखकर सड़क जाम कर दी और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मामले की न्यायिक जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।
इस बीच भोजपुर एसपी की अनुशंसा पर शाहाबाद रेंज के डीआईजी सत्यप्रकाश ने शाहपुर थाना अध्यक्ष राजेश मालाकार, एक सब-इंस्पेक्टर और तीन पुलिस जवानों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
भरत तिवारी के पिता ने पुलिसिया कार्रवाई पर उठाए सवाल
वहीं, मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पहले ही पुलिस को अपने बेटे की मानसिक स्थिति के बारे में जानकारी दी थी और उसे सुरक्षित पकड़ने की अपील की थी। उन्होंने आरोप लगाया, "मैं खुद थाना गया था और पुलिस को बताया था कि मेरे बेटे का मानसिक संतुलन ठीक नहीं है। उसे समझाकर पकड़ लीजिए, लेकिन मेरी बात नहीं सुनी गई। पूरे दिन मुझे थाने में बैठाकर रखा गया और इसी दौरान यह घटना हो गई।"
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परिजनों का दावा है कि भरत तिवारी का कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था और उसे जिंदा गिरफ्तार किया जा सकता था। उनका आरोप है कि पुलिस ने उसे पकड़ने के बजाय मारने की योजना बनाई।
मृतक के पिता ने आरोप लगाते हुए कहा कि इतनी बड़ी पुलिस फोर्स और एसटीएफ की टीम चाहती तो उसे जिंदा पकड़ सकती थी। पुलिस पहले कह रही थी कि उसके पैर में गोली लगी है और वह बच जाएगा,लेकिन बाद में उन्होंने उसकी मौत की खबर दे दी गई।
