दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के लेवल में उतार-चढ़ाव जारी है। शनिवार सुबह 10 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 201 यानी खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, एक दिन पहले शाम चार बजे दर्ज 24 घंटे का औसत एक्यूआई 183 यानी ’मध्यम’ श्रेणी में था। दिल्ली के लिए एक्यूईडब्ल्यूएस ने अगले कुछ दिनों तक एक्यूआई के ’खराब’ श्रेणी में बने रहने का पूर्वानुमान जताया है। हालांकि, सरकार ने शहर के कुछ हिस्सों में की ’इनोवेशन चैलेंज’ के तहत वायु प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से लगाए गए उपकरणों का शनिवार को निरीक्षण किया है।
दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए लगाए गए सेंट्रल वर्ज एयर प्यूरीफायर
सीएम रेखा गुप्ता ने पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के साथ कीर्ति नगर औद्योगिक क्षेत्र के पास लगाए गए ’पोल-माउंटेड डस्ट कलेक्टर’ और कीर्ति नगर फायर स्टेशन पर स्थापित ’सेंट्रल वर्ज एयर प्यूरीफायर’ का निरीक्षण किया। पिछले साल अक्टूबर में सिरसा ने प्रदूषण कम करने के लिए इस पहल की शुरुआत की थी, जिसमें व्यक्तियों, स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों को पीएम2.5 और पीएम10 जैसे कणों के उत्सर्जन को कम करने के लिए विचार प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया था।
निरीक्षण के दौरान सिरसा ने बताया कि उपकरण में लगातार धूल जमा होती रहती है और लगभग 15-20 दिन बाद जब यूनिट भर जाती है तो बैकएंड तकनीक अधिकारियों को सूचित कर देती है। उन्होंने कहा कि यह उपकरण 400 वर्ग मीटर के दायरे से धूल एकत्र कर सकता है। सिरसा ने यह भी बताया कि उपकरण को सुरक्षा के लिए लोहे के फ्रेम के अंदर लगाया जाएगा।
प्रदूषण के विरुद्ध दिल्ली का युद्ध लगातार जारी है। यह केवल एक मौसम की नहीं, बल्कि 365 दिन स्वच्छ हवा और बेहतर जनस्वास्थ्य के लिए चलने वाला अभियान है। इसी दिशा में आज मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा रेखा गुप्ता ने अपने कैबिनेट सहयोगी पर्यावरण मंत्री श्री मनजिंदर सिंह सिरसा जी और विधायक श्री हरीश खुराना जी के साथ “Made in India” अत्याधुनिक Air Purification Technologies का ऑन-ग्राउंड निरीक्षण किया।
सत गुरु राम सिंह मार्ग पर 21 डिवाइस
सत गुरु राम सिंह मार्ग पर 21 डिवाइस लगाए गए हैं। यह advanced self-cleaning system smoke, dust, PM2.5, PM10 और हानिकारक प्रदूषण को नियंत्रित करते हुए प्रतिघंटा लगभग 3 लाख लीटर हवा को ट्रीट करता है। भारत का पहला zero-emission moving anti-smog system, जो कीर्ति नगर और मायापुरी क्षेत्र में तैनात है। यह सड़कों की धूल और पॉल्यूशन को कम कर क्लीन एयर कॉरिडोर बनाकर बेहतर विजिबिलिटी और साँस लेने में आराम सुनिश्चित करेगा। कीर्ति नगर फायर स्टेशन के पास लगाया गया यह प्रणाली वाहन प्रदूषण को source level पर capture और ट्रीट करता है। इस डिवाइस से फ़ील्ड परीक्षण में कणिकीय प्रदूषण में लगभग 29% तक कमी दर्ज की गई है।
कितना प्रदूषण खतरनाक?
सीपीसीबी के मानकों के अनुसार, एक्यूआई को शून्य से 50 के बीच ’अच्छा’, 51 से 100 के बीच ’संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ’मध्यम’, 201 से 300 के बीच ’खराब’, 301 से 400 के बीच ’बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ’गंभीर’ माना जाता है।
