भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में भारतीय रेलवे की यात्री सुविधाओं और स्वच्छता व्यवस्था की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। 12 अगस्त को संसद में पेश की गई रिपोर्ट (Passenger amenities and sanitation at non-suburban railway stations in Indian Railways) में खुलासा हुआ है कि रेलवे बोर्ड के स्पष्ट दिशानिर्देशों के बावजूद विभिन्न जोनों ने नियमों का कड़ाई से पालन नहीं किया। इसके चलते स्टेशनों पर वाटर कूलर के पानी में खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने से लेकर शौचालयों में भारी गंदगी जैसी कमियां पाई गई हैं।
59 स्टेशनों पर पीने के पानी की नहीं हुई थी जांच (सांकेतिक चित्र)
89% से अधिक स्टेशनों पर न्यूनतम सुविधाओं की कमी
CAG ने देश भर के 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों का विस्तृत ऑडिट किया। जांच में सामने आया कि इनमें से 458 स्टेशन यानी 89% से अधिक न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं (MEA) के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। कई प्रमुख स्टेशनों पर पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था, शौचालय, पंखे, शेड और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड जैसी बुनियादी चीजें या तो उपलब्ध ही नहीं थीं, या जरूरत से काफी कम थीं।
इन स्टेशनों के वाटर कूलर में मिले बैक्टीरिया
रिपोर्ट के मुताबिक, 6 रेलवे जोनों के 59 स्टेशनों पर पीने के पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच तक नहीं कराई गई। जिन स्टेशनों पर पानी के सैंपल जांचे गए, उनमें से कई प्रमुख स्टेशनों के वाटर कूलर में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई। इनमें सेंट्रल रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावाला, दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पलक्काड जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद और पूर्व रेलवे के मधुपुर शामिल हैं। इसके अलावा, वर्ष 2022-23 में 49 स्टेशनों और 2023-24 में 56 स्टेशनों के नलों से लिए गए पानी के नमूनों में टोटल कॉलीफॉर्म्स (जिसमें E-coli शामिल है) की मौजूदगी पाई गई।
NSG-1 श्रेणी के बड़े टर्मिनल्स की हालत भी खस्ता
रेलवे बोर्ड ने अप्रैल 2018 में निर्देश जारी किए थे कि 31 अगस्त 2018 तक सभी स्टेशनों पर अनिवार्य रूप से Minimum Essential Amenities (MEA) सुनिश्चित की जाएं। हालांकि, रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि NSG-1 श्रेणी के प्रीमियम स्टेशन, जैसे नई दिल्ली, सीएसएमटी (मुंबई), हावड़ा, सियालदह और मुंबई सेंट्रल भी यूरिनल, शौचालय, डस्टबिन, पानी के नल और साइन बोर्ड जैसी सुविधाओं में पिछड़े हुए हैं।
CAG की सिफारिशें
CAG ने रेलवे मंत्रालय को सुझाव दिया है कि जल आपूर्ति प्रणालियों के निरीक्षण के लिए तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जाए। इसके साथ ही, यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वाटर क्वालिटी प्रोटोकॉल के तहत सभी स्टेशनों पर पीने के पानी की नियमित और व्यापक जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि यात्रियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा हो सके।
