पंडित दीनदयाल उपाध्याय का मानना था कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि समाज की सेवा होना चाहिए : डॉ. मोहन यादव

  • Edited by: TN Digial
  • Updated Feb 11, 2025, 11:05 AM IST

पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक महान ऋषि-राजनेता थे, जिन्होंने एकात्म मानवदर्शन का सूत्र दिया और जनसंघ की स्थापना की। उनका मानना था कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि समाज की सेवा होना चाहिए। उन्होंने वेदों में वर्णित चार पुरुषार्थ-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के आधार पर भारत के भविष्य की कल्पना की। उनका विचार था कि सही तरीके से अर्थ उपार्जन और संतुलित जीवन से स्वावलंबी और समर्थ समाज का निर्माण किया जा सकता है। आज यानी 11 फरवरी 2025 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर विशेष -

व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण का दर्शन देने वाले विलक्षण व्यक्तित्व के धनी, एकात्म मानव दर्शन तथा अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के चरणों में कोटिशः नमन। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर यह विशेष लेख लिखा है -

Pandit-deendayal-upadhyay death anniversary

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर विशेष

पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऐसे ऋषि-राजनेता रहे, जिन्होंने राजनैतिक चिंतन के लिए एकात्म मानवदर्शन का सूत्र दिया और शासन की नीतियां बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। दीनदयाल जी जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्र जीवन दर्शन के दृष्टा हैं। पंडित जी द्वारा लगाए गए जनसंघ के पौधे का विस्तार विचार के रूप में देश ही नहीं, दुनिया में भी हुआ है। उन्होंने एक ऐसी राजनैतिक धारा निर्मित की जिसका लक्ष्य राष्ट्र निर्माण है। उनका मानना था कि राजनीति सत्ता के लिए नहीं अपितु समाज की सेवा के लिए हो, स्वतंत्रता के साथ भारत राष्ट्र की यात्रा भारतीय दर्शन के अनुरूप होनी चाहिए।

End of Feed