वीरांगना दुर्गावती बाघ सेंचुरी में छोड़े जाएंगे चीते, विदेशी नस्लों का होगा दीदार; जानें MP में कितने टाइगर?

मध्यप्रदेश के वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य में चीते बसाए जा सकते हैं। वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य को भारत में चीतों का तीसरा ठिकाना बनाने के बारे में पूछे जाने पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के एक अधिकारी ने कहा कि “भारत में चीता लाने के लिए कार्य योजना” में इस क्षेत्र को केवल संभावित स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

भोपाल : प्राधिकारी मध्यप्रदेश के वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य को चीतों के नये आवास के रूप में विकसित करने पर विचार कर रहे हैं। आधिकारिक दस्तावेजों से यह बात सामने आई है। दस्तावेजों के मुताबिक, वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य में चीतों को बसाने के विचार पर पहली बार दिसंबर 2024 में चीता परियोजना संचालन समिति की बैठक में चर्चा की गई थी। वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य को भारत में चीतों का तीसरा ठिकाना बनाने के बारे में पूछे जाने पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के एक अधिकारी ने कहा कि “भारत में चीता लाने के लिए कार्य योजना” में इस क्षेत्र को केवल संभावित स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

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(फाइल फोटो)

मध्यप्रदेश के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक शुभरंजन सेन ने कहा, “बैठक में इस पर चर्चा हुई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक कुछ नहीं हुआ है। हालांकि, एक अन्य अधिकारी ने बताया कि मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के गांधी सागर अभयारण्य के बाद गुजरात के कच्छ जिले के बन्नी घास के मैदान और फिर राजस्थान के जैसलमेर जिले के शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में चीते छोड़े जाएंगे।

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