भोपाल

मजदूर बना लखपति, पन्ना की धरती ने फिर दिखाया चमत्कार, खदान से मिला 40 लाख का हीरा

मध्य प्रदेश की धरती पन्ना में एक बार फिर चमत्कार हुआ है। मजदूर पहले दिन ही बन गया लखपति और जो हीरा मिला है उसकी अनुमानित कीमत 40 लाख से ज्यादा की बताई जा रही है।

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पन्ना में मजदूर को मिला 40 लाख का हीरा,अधिकारी ने की पुष्टि - (फोटो - टाइम्स नाउ नवभारत

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के पन्ना में एक शख्स के रातोरात लखपति बन जाने का मामला सामने आया है। पन्ना की धरती पर ऐसा चमत्कार कई बार हो चुका है जब किसी शख्स को अचानक खदान से कीमती हीरे मिलने की बात सामने आई हो और वो रातोरात अमीर बन गया हो।

पन्ना के एक साधारण मजदूर माधव की जिंदगी अब बदल गई है। पन्ना की कृष्णा कल्याणपुर पट्टी की उथली खदान में मजदूरी करने वाले इस युवक को उस वक्त बड़ी सौगात मिली जब उसने पहली बार खदान खोदी और उसकी किस्मत चमक उठी। पहले ही दिन उसे 11 कैरेट 95 सेंट का उज्जवल किस्म का बेशकीमती हीरा हीरा मिल गया। बताया जा रहा है कि यह हीरा इतना साफ और कीमती है कि इसकी अनुमानित कीमत 40 लाख रुपए से भी ज्यादा आंकी जा रही है।

माधव ने इसे नियम अनुसार पन्ना स्थित हीरा कार्यालय में जमा कर दिया है। अब यह हीरा आगामी नीलामी में जाएगा और नीलामी की रकम में से 12.5 फीसदी रॉयल्टी काटकर बाकी रकम मजदूर माधव को दी जाएगी। जहां एक मजदूर ने अपने हौसले और मेहनत से करोड़ों लोगो की उम्मीद जगा दी। पन्ना की धरती से ऐसे कई सपने सच होते हैं ।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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