गुफाओं में उकेरी लकीरें और तस्वीरें नहीं, पूर्वजों ने यहां हमारे लिए छोड़ा है टाइम-कैप्सूल

भोपाल से लगभग 45 किलोमीटर दूर रायसेन जिले में बसी हैं भीमबेटका गुफाएं। इन गुफाओं की खासियत पाषाण काल में इन पर बनाए गए चित्र हैं। यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा बन चुकीं इस जगह का संबंध महाभारत की कथा से भी जुड़ता है।

भीमबेटका कोई आम जगह नहीं है। खुद में मानव सभ्यता की शुरुआती निशानियां समेटे ये जगह आज की सभ्यता के लिए बेहद खास है। मानवों के खींचे सबसे प्राचीन चिह्नों में से एक, भीमबेटका में हमारे पूर्वजों ने कहीं से रंग इकट्ठा करने का और फिर दीवार पर चित्रों को उकेरने का जतन किया था। जो उनकी दिनचर्या और क्रियाकलापों का एक मिलाजुला संदेश देने की कोशिश करता है।

bhimbetka caves near bhopal

भीमबेटका गुफाओं में पूर्वजों ने छोड़े हैं अपनी सभ्यताओं के चिह्न

नाचते, वाद्य यंत्र बजाते, शिकार करते, जानवरों की सवारियां करते और शहद इकट्ठा करते यह चित्र बताते हैं कि आज से लगभग 30 हजार साल पहले ये चीजें कैसे होती होंगी।

End of Feed