Azamgarh News: यूपी के आजमगढ़ जिले का अहरौला क्षेत्र इस वक्त गहरे सदमे में है। शंभूपुर गांव में मंगलवार शाम एक घर के भीतर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते एक भयानक खूनी खेल में बदल गया। इस पूरे मामले में अब तक 5 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन घटना के दूसरे दिन 8 वर्षीय मासूम शौर्य की मौत को लेकर पुलिस और परिजनों के बयान आमने-सामने आ गए हैं।
आजमगढ़ में पूजा के दौरान अंधाधुंध फायरिंग
मृतक बच्चे की बुआ साधना और दादी श्याम बली देवी ने मीडिया के सामने आकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 8 साल के शौर्य की मौत आरोपी की गोली से नहीं, बल्कि पुलिस (Azamgarh Police) की गोली लगने से हुई है। परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। दूसरी ओर, जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. अनिल कुमार ने परिजनों के इन दावों को सिरे से खारिज किया है।
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मामले को लेकर क्या बोली पुलिस?
पुलिस के मुताबिक, आरोपी अरविंद सिंह पिछले कुछ समय से अवसाद में था। परिजनों को लगता था कि उस पर प्रेत बाधा है, जिसे दूर करने के लिए घर में तीन-चार दिनों से पूजा-अनुष्ठान कराया जा रहा था। मंगलवार शाम जब अरविंद बाजार से घर लौटा, तो वह पंडितों से आधार कार्ड मांगने लगा। इसी बात पर बहस बढ़ी और उसने अपनी लाइसेंसी पिस्टल निकालकर फायरिंग ((Azamgarh Golikand) कर दी।
आरोपी ने कमरे के अंदर अपने ही बेटे को मारी गोली-पुलिस का दावा
इस दौरान अरविंद की पत्नी बबीता और दो पंडितों (महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा) की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी ने बच्चों को बंधक बनाकर खुद को कमरे में बंद कर लिया। मौके पर पहुंचे एडीजी, डीआईजी और पुलिस बल ने करीब 6 से 7 घंटे तक उसे समझाने की कोशिश की।
पुलिस का कहना है कि जब आरोपी ने कमरे के अंदर अपने ही बेटे को गोली मार दी, तब पुलिस दरवाजा तोड़कर घुसी। आरोपी द्वारा की गई ताबड़तोड़ फायरिंग के जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की, जिसमें आरोपी घायल हुआ और बाद में इलाज के दौरान उसकी व मासूम बच्चे की मौत हो गई। फिलहाल गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात है और सभी शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
