Assam Excise Amendment Rules 2026: असम सरकार ने राज्य के आबकारी (Assam new liquor policy) क्षेत्र में बड़े सुधारों को लागू करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद आबकारी विभाग ने 'असम आबकारी (संशोधन) नियम 2026' को पूरे राज्य में लागू कर दिया है। इन नए नियमों के तहत राज्य में शराब की बिक्री, दुकानों की लोकेशन और लाइसेंस ट्रांसफर को लेकर बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं। साथ ही स्थानीय जनजातीय समुदायों के पारंपरिक पेय पदार्थों (Heritage Drinks) को कानूनी सुरक्षा और बढ़ावा देने का खास इंतजाम किया गया है।
असम सरकार का बड़ा फैसला
राजस्व के कड़े नियम
नए नियमों के मुताबिक, विदेशी शराब (IMFL), बीयर और देसी शराब के सभी होलसेल और रिटेल ऑफ (OFF) दुकानों के लिए सरकार को हर वित्तीय वर्ष में एक 'न्यूनतम गारंटीकृत राजस्व' (MGR) देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसे चार तिमाहियों में वसूला जाएगा। तय समय पर राजस्व न देने पर 10% का जुर्माना और देरी के लिए 1.5% प्रति माह की दर से ब्याज लगेगा।
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फुल पेग की माप 60 मिलीलीटर तय
इसके अलावा, दो शराब दुकानों के बीच की दूरी के नियमों को भी कड़ा किया गया है। अब कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) जिले में दो दुकानों के बीच कम से कम 500 मीटर, अन्य नगर निगमों व कस्बों में 1 किलोमीटर और ग्रामीण इलाकों में कम से कम 2 किलोमीटर की दूरी होना जरूरी है। 'ऑफ' दुकानों पर अब न्यूनतम 180 मिलीलीटर या उससे बड़ी सीलबंद बोतलें ही बेची जा सकेंगी, जबकि बार ('ऑन' शॉप) में कम से कम 750 मिलीलीटर की बोतलों का इस्तेमाल होगा, जहां एक फुल पेग की माप 60 मिलीलीटर तय की गई है।
लाइसेंस ट्रांसफर पर पाबंदी
दुकानों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने पर भी कई बंदिशें लगाई गई हैं। कोई भी शराब दुकान ग्रामीण इलाके से शहरी इलाके में शिफ्ट नहीं की जा सकेगी, हालांकि शहर से गांव में ले जाने की इजाजत होगी। इसके अलावा, दूसरे जिलों से दुकानें कामरूप (मेट्रो) जिले में नहीं लाई जा सकेंगी, और लाइसेंस मिलने के 3 साल के भीतर जिला बदलने की अनुमति नहीं होगी।
स्थानीय पारंपरिक ड्रिंक्स को मिला बड़ा बढ़ावा
असम के आदिवासी और स्वदेशी समुदायों के लिए सरकार ने एक क्रांतिकारी फैसला लिया है। विभिन्न जनजातीय समुदायों द्वारा बनाई जाने वाली पारंपरिक 'हेरिटेज' शराब को कानूनी सुरक्षा और व्यापारिक बढ़ावा देने के लिए बड़ी छूट दी गई है। अब इन पारंपरिक ड्रिंक्स को बनाने का लाइसेंस सिर्फ और सिर्फ स्थानीय मूल निवासियों या विशिष्ट जनजातीय समूहों को ही मिलेगा, ताकि बाहरी लोग इसका आर्थिक शोषण न कर सकें।
स्थानीय छोटे कारोबारियों की मदद के लिए माइक्रो-मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस की फीस 25,000 रुपये से घटाकर 15,000 रुपये कर दी गई है। वहीं, हेरिटेज शराब बेचने के रिटेल लाइसेंस की फीस को 5,000 रुपये से घटाकर मात्र 500 रुपये कर दिया गया है। इन छोटी इकाइयों के लिए रोजाना उत्पादन की अधिकतम सीमा 1,000 लीटर तय की गई है। साथ ही, 'असम मेड लिकर' नाम से एक नई कैटेगरी भी जोड़ी गई है, जिसकी अल्कोहल क्षमता 17.12% होगी।
