अरावली खत्म हुई तो बढ़ेगा रेगिस्तान, विशेषज्ञों की चेतावनी; अवैध खनन से खतरे में अस्तित्व

पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि अवैध खनन और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण अरावली पर्वतमाला अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अरावली के कमजोर होने से रेगिस्तान बढ़ सकता है, ग्राउंड वॉटर लेवल घट सकता है और उत्तर-पश्चिम भारत की जल व खाद्य सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

देश की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला अरावली पर्वतमाला को उत्तर भारत की पर्यावरणीय ढाल माना जाता है, लेकिन अब यह गंभीर खतरे का सामना कर रही है। पर्यावरणविदों, पारिस्थितिकीविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक समूह ने बुधवार को कहा कि अरावली पर्वतमाला अवैध खनन और अवसंरचना परियोजनाओं के कारण अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है। पर्यावरणविदों, पारिस्थितिकीविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक बयान में कहा कि अरावली पर्वतमाला का नष्ट होना मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया को तेज कर सकता है। उन्होंने कहा कि इसका कारण यह है कि यह पर्वतमाला उत्तरी मरुस्थलीकरण के खिलाफ एक प्राकृतिक अवरोधक है और यह जैव विविधता तथा जल पुनर्भरण का बचाव करता है।

Aravalli Hills

अवैध खनन से अरावली का अस्तित्व खतरे में, पर्यावरणविदों ने जताई चिंता

'अरावली विरासत जन अभियान' समूह ने 'विश्व मरुस्थलीकरण एवं सूखा रोकथाम दिवस' पर यह बयान जारी किया, जिसे हर वर्ष 17 जून को मनाया जाता है। समूह की सह-संस्थापक नीलम अहलूवालिया ने कहा, ’’विशेषज्ञ मरुस्थलीकरण को सीधे खनन के कारण अरावली पर्वतमाला के बड़े पैमाने पर विनाश से जोड़ते हैं।’’

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