देहरादून : अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर विवाद तेज हो गया है। मामले से कथित तौर पर जुड़े 'वीआईपी' की संवैधानिक पद पर नियुक्ति का विरोध करते हुए अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया। वे दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने का विरोध कर रहे थे। बृहस्पतिवार तड़के पुलिस ने अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिया, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। इस बीच उत्तराखंड पुलिस ने हत्याकांड की जांच और न्यायिक कार्यवाही को लेकर अपनी कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा साझा किया है।
उत्तराखंड पुलिस (फोटो-@DIPR_UK)
अंकिता हत्याकांड की जांच पर उत्तराखंड पुलिस ने क्या बताया?
अंकिता हत्याकांड पर अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने बताया कि सितंबर 2022 में ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में कार्यरत अंकिता भंडारी की हत्या के मामले में पुलिस ने घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया था।
एडीजी के मुताबिक, घटना की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर तत्काल विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। जांच दल की अध्यक्षता डीआईजी स्तर की महिला आईपीएस अधिकारी को सौंपी गई, ताकि मामले की गहन जांच की जा सके।
88 दिन में जांच, करीब 500 पन्नों का आरोपपत्र
डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि एसआईटी ने जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य जुटाए। अभियुक्तों से पूछताछ के साथ फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयानों का भी विश्लेषण किया गया। पुलिस के अनुसार, एसआईटी ने 88 दिनों में जांच पूरी कर करीब 500 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। उत्तराखंड शासन की ओर से भी मामले की त्वरित सुनवाई और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए गए।
तीनों दोषियों को आजीवन कठोर कारावास
एडीजी ने बताया कि एसआईटी की जांच में जुटाए गए साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की पैरवी के बाद 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार दिया। अदालत ने तीनों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। तीनों दोषी वर्तमान में जेल में बंद हैं और आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
