कहते हैं खूबसूरती देखने वाले के आंखों में होती है। लेकिन कुछ जगहों की खूबसूरती इस कहावत को भी झुटला देती हैं। क्योंकि यह जगहें इतनी खूबसूरत होती हैं कि ऐसा शख्स चिराग लेकर भी नहीं मिलता जिसे वहां खूबसूरती नजर न आए। खासतौर पर अगर बात भारत के किसी दूर-दराज के गांव की हो तो खूबसूरती खिलकर आती है। हिमाचल प्रदेश में तिब्बत बॉर्डर के पास एक गांव है, जो बॉर्डर से पहले भारत का अंतिम गांव भी है। इस गांव की खूबसूरती ने मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा का भी ध्यान आकर्षित किया है।
उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने जैसे ही हिमाचल प्रदेश के चिटकुल गांव की तस्वीर सोशल मीडिया पर डाली, वैसे ही वायरल हो गई। हर कोई इस गांव की खूबसूरती का कायल हो गया। कई लोग तो यह भी पूछ रहे हैं कि यह फोटो असली है या AI से बनाई गई है। आनंद महिंद्री ने 20 जुलाई को चिटकुल की जो फोटो अपने X हैंडल से शेयर की उसे फोटोग्राफर दिव्या एल चैतन्य ने लिया है।
तस्वीर को गौर से देखें तो साफ आसमान, बर्फ से ढकी चोटियां और उनके बीच से सांप सी लहराती बास्पा नदी का नीला पानी नजर आता है। तस्वीर जितनी खूबसूरत नजर आती है, यह जगह उससे भी सुंदर है। सर्दियों में यहां की पहाड़ी ढलानें बर्फ से सफेद हो जाती हैं। यह गांव सस्टेनेब्लिटी का उदाहरण है। खूबसूरती के बीच गांव ने हिमालय की समृध संस्कृति को सहेजकर रखा है।
तो कहां है चिटकुल?
चिटकुल समुद्र तल से 3450 मीटर की ऊंचाई पर बसा गांव है। यह हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में भारत-तिब्बत रूट पर देश का अंतिम गांव है। यहां के कठिन मौसम के चलते साल के कुछ ही महीनों में यहां जाना संभव हो पाता है। भारी बर्फबारी और ठंड के कारण यहां जन-जीवन बहुत कठिन है। यह तिब्बत सीमा से पहले अंतिम गांव है, जहां पर आबादी रहती है। चिटकुल अपार खूबसूरती, ग्लेशियर, बर्फ से ढकी चोटियों और बर्फीली नदियों के साथ ही घास के मैदानों से समृद्ध है। इस गांव में बहुत ही कम आबादी रहती है और यहां इतनी शांति है कि ऐसी शांति मशहूर हिल स्टेशनों पर मिलना नामुमकिन है।

चिटकुल की समुद्र तल से ऊंचाई (फोटो - Incredible India)
चिटकुल में टूरिज्म का एक ग्रीन मॉडल है, जो इस पहाड़ी गांव की सस्टेनेब्लिटी के लिए काफी महत्वपूर्ण है। मन मोह लेने वाली खूबसूरती के साथ ही चिटकुल जागरूक जीवनशैली का एक अद्भुत नमूना है। यहां के लोग ऑर्गेनिक फार्मिंग करते हैं, जो केमिकल पर ना के बराबर निर्भर हैं। लोग मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए स्थानीय पेड़ प्रजातियों से क्षेत्र में वनीकरण बढ़ाते हैं। प्लास्टिक की जगह पर्यावरण अनुकूल विकल्पों के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया जाता है। पर्यटन को इस तरह से बढ़ावा दिया जाता है कि इसका असर पर्यावरण पर कम से कम पड़े। यहां पर धीरे-धीरे पर्यटन संबंधी गतिविधियां बढ़ रही हैं, लेकिन लोगों की जागरूकता के चलते चिटकुल की खूबसूरती बनी हुई है।
एडवेंचर और आध्यात्मिक पर्यटन मैप पर चिटकुल
एडवेंचर के लिए जाने वाले लोग हों या धार्मिक पर्यटन के लिए, चिटकुल दोनों तरह से लोगों के लिए एक प्रमुख गेटवे है। यह हिमालय का एक प्रमुख द्वार है, जो किन्नौर-कैलाश परिक्रमा रूट पर मौजूद है। माना जाता है कि किन्नौर कैलाश पर्वत भगवान शिव से जुड़ा हुआ है। यहां के ट्रैक की तरफ श्रद्धालुओं के साथ ही पहाड़ों की ट्रैकिंग करने वाले भी खिंचे चले आते हैं।

खूबसूरत चिटकुल (फोटो - Incredible India)
यहां के सेब के बगीचे, कल-कल बहती नदी धारा के साथ ट्रैक और मखमली खास के मैदानों के साथ ही हिमालयी जीव-जंतु यहां आने वाले लोगों को अद्भुत खूबसूरती के बीच आनंद का अनुभव कराते हैं।
चिटकुल का नजदीकी शहर और कैसे पहुंचें
चिटकुल का सबसे नजदीकी शहर रेकॉन्ग पिओ (Reckong Peo) है। यहां का नजदीकी एयरपोर्ट चंडीगढ़ में है। अगर आप ट्रेन से यात्रा करना चाहते हैं तो चंडीगढ़ और कालका तक ट्रेन से जा सकते हैं। चंडीगढ़ और दिल्ली से शिमला के लिए बसें भी मौजूद हैं। शिमला पहुंचकर आपको सांग्ला घाटी (Sangla Valley) से होते हुए रेकॉन्ग पिओ पहुंचना होगा। बता दें कि हिमाचल रोडवेड (HRTC) की बसें दिल्ली और चंडीगढ़ से रेकॉन्ग पिओ तक जाती हैं। रेकॉन्ग पिओ से आप टैक्सी या स्थानीय बस लेकर चिटकुल पहुंच सकते हैं। रेकॉन्ग से चिटकुल की दूरी करीब 65 किमी है।
