Noida News: नोएडा के मास्टर प्लान रोड-1 पर सेक्टर-3 स्थित रजनीगंधा अंडरपास से लेकर सेक्टर-57 तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के लिए गुरुवार को अलाइनमेंट सर्वे किया जाएगा। इस दौरान आईआईटी की टीम प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ मौके का निरीक्षण कर मौजूदा स्थिति का आकलन करेगी। एमपी-1 पर इस एलिवेटेड रोड के निर्माण की योजना पहले ही बनाई जा चुकी है। इस परियोजना का शिलान्यास वर्ष 2015 में उस समय के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा किया गया था।
नोएडा में सेक्टर-3 से सेक्टर-57 तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के लिए अलाइनमेंट सर्वे (प्रतीकात्मक फोटो)
पत्र भेजकर सर्वे कराने का अनुरोध
इसके बाद यह परियोजना लंबे समय तक ठप पड़ी रही। अब प्राधिकरण ने एक बार फिर एलिवेटेड रोड के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। हाल ही में प्राधिकरण ने आईआईटी को पत्र भेजकर सर्वे कराने का अनुरोध किया था, जिसके तहत टीम गुरुवार को मौके पर पहुंचेगी। इस दौरान यह जांचा जाएगा कि एलिवेटेड रोड के निर्माण और उसके लूप (एंट्री-एग्जिट) तैयार करने में किसी प्रकार की बाधा तो नहीं है।
10 लेन वाले एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव
इसके साथ ही, डीएनडी से यमुना पुस्ता के रास्ते यमुना एक्सप्रेसवे को सीधे जोड़ने के लिए 10 लेन वाले एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिस पर प्राधिकरण ने काम शुरू कर दिया है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में इस परियोजना को जमीन पर उतारना आसान नहीं माना जा रहा है। इसका प्रमुख कारण इस क्षेत्र में स्थित दलित प्रेरणा स्थल और ओखला पक्षी विहार हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जेवर एयरपोर्ट के चालू होने के बाद वाहनों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिसे देखते हुए इस योजना पर विचार किया जा रहा है।
पुस्ता मार्ग पर छह लेन के एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव
फिलहाल पुस्ते पर छह लेन का एक्सप्रेसवे बनाया जाना प्रस्तावित है, जिसे चिल्ला एलिवेटेड रोड से जोड़ने की योजना है। चिल्ला एलिवेटेड रोड महामाया फ्लाईओवर पर आकर समाप्त होगी और वहां से एक नए एलिवेटेड मार्ग के जरिए पुस्ता को कनेक्ट किया जाएगा। इसके साथ ही अधिकारियों द्वारा डीएनडी से सीधे पुस्ता तक संपर्क स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है। प्राधिकरण के मुताबिक, इस मार्ग को भविष्य में 10 लेन तक विस्तारित करने की योजना बनाई जा रही है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में चार या छह लेन से अधिक का निर्माण संभव नहीं दिख रहा है। इसकी प्रमुख वजह रास्ते में स्थित दलित प्रेरणा स्थल है, जहां निर्माण की अनुमति हासिल करना आसान नहीं है।
