डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों आम नागरिकों और दुकानदारों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर आई है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में यह खबर तेजी से वायरल हो रही थी कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर चार्ज वसूला जाएगा। इस भ्रम को पूरी तरह खत्म करते हुए देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेन-देन पर लगने वाला मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) केवल दुकानदारों और मर्चेंट्स (Merchants) पर लागू होता है, न कि आम ग्राहकों पर। यानी आम यूजर्स के लिए यूपीआई से पेमेंट करना पहले की तरह पूरी तरह से मुफ्त रहेगा।
2000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर आपसे लिया जाएगा MDR चार्ज या नहीं?
वित्त मंत्री ने क्या कहा?
संसद में दिए गए अपने बयान में वित्त मंत्री ने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार और फिनटेक कंपनियां लगातार काम कर रही हैं। 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाला एमडीआर (MDR) वास्तव में उस शुल्क का हिस्सा है जो बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स बिजनेस संस्थाओं से वसूलते हैं ताकि सिस्टम का रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। आम ग्राहक जब भी किसी दुकान, सुपरमार्केट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करके या यूपीआई आईडी से पेमेंट करेंगे, तो उनके खाते से सिर्फ उतनी ही रकम कटेगी जितने का उन्होंने सामान या सर्विस खरीदी है।
UPI यूजर्स के लिए राहत की खबर
वित्त मंत्री के इस आधिकारिक बयान के बाद गूगल पे (Google Pay), फोनपे (PhonePe), पेटीएम (Paytm) और अन्य यूपीआई ऐप्स का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों ग्राहकों ने राहत की सांस ली है। सरकार का मुख्य मकसद देश में डिजिटल लेन-देन को आसान और पारदर्शी बनाए रखना है, ताकि छोटे से छोटे व्यापारी से लेकर आम ग्राहक तक बिना किसी हिडन चार्ज के डर के इसका इस्तेमाल कर सकें। ऐसे में अगर कोई व्यापारी आपसे 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर एक्स्ट्रा चार्ज की मांग करता है, तो आप स्पष्ट रूप से जान लें कि ऐसा कोई नियम ग्राहकों के लिए नहीं बनाया गया है।
