नोएडा के सेक्टर 66 (ममूरा)में एक बहुमंजिला इमारत की पार्किंग में खड़ी इलेक्ट्रिक बाइक में अचानक हुई स्पार्किंग और उसके बाद लगी भीषण आग में दो लोगों की दर्दनाक मौत के हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना के बाद, जहां एक तरफ फायर ब्रिगेड ने 100 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, वहीं दूसरी तरफ इस हादसे ने हर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) मालिक के जहन में सुरक्षा और वित्तीय सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर उनके इलेक्ट्रिक स्कूटर या कार में अचानक आग लग जाए, तो क्या बीमा कंपनी इस भारी नुकसान की भरपाई करेगी या नहीं। आइए जानते हैं?
EV में आग लगने पर इंश्योरेंस क्लेम मिलेगा या नहीं?
क्या EV में ब्लास्ट होने पर मिलेगा इंश्योरेंस?
बीमा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सीधा जवाब 'हां' है, लेकिन इसके लिए आपकी बीमा पॉलिसी का सही होना और नियमों की सटीक जानकारी होना बेहद अनिवार्य है। वर्तमान में इंश्योरेंस रेगुलेटर्स या कंपनियों द्वारा इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए कोई अलग से विशेष गाइडलाइन या स्वतंत्र पॉलिसी नहीं बनाई गई है, बल्कि मौजूदा व्यवस्था के तहत आपकी ईवी को भी पारंपरिक वाहनों की तरह ही 'कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी' (Comprehensive Motor Insurance Policy) के दायरे में कवर किया जाता है, जिसके तहत चार्जिंग के दौरान शॉर्ट-सर्किट से लगी आग या सड़क पर चलते समय वाहन के धू-धू कर जलने की घटनाओं को शामिल किया जाता है।
कितना मिलता है इंश्योरेंस?
अगर आपके इलेक्ट्रिक वाहन में आग लग जाती है, तो मिलने वाले मुआवजे की रकम पूरी तरह से आपकी पॉलिसी के प्रकार पर निर्भर करेगी; जैसे अगर आपके पास सिर्फ बेसिक 'थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस' है, तो आग लगने पर आपको एक भी रुपया नहीं मिलेगा क्योंकि यह कवर सिर्फ आपकी गाड़ी से दूसरों को हुए नुकसान की भरपाई करता है, जबकि 'कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस' (ओन डैमेज) एक ऑल-राउंडर कवर है जो एक्सीडेंट, चोरी और प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ आग से होने वाले नुकसान की पूरी भरपाई करता है। इस पॉलिसी के तहत मुआवजे की कुल राशि आपकी गाड़ी की 'आईडीवी' (IDV - Insured Declared Value) यानी बीमा कराते समय तय की गई बाजार कीमत के आधार पर निर्धारित होती है, जिसमें सामान्यतः गाड़ी की उम्र के हिसाब से डेप्रिसिएशन (कटौती) काटी जाती है, लेकिन अगर आपने 'जीरो डेप्रिसिएशन' या 'रिटर्न टू इनवॉइस' जैसे प्रीमियम एड-ऑन कवर्स ले रखे हैं, तो आपको वाहन की लगभग पूरी शोरूम कीमत वापस मिल सकती है।
हालांकि, क्लेम हासिल करने के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं क्योंकि अगर आपने अपनी ईवी में बाहर से कोई अनधिकृत मॉडिफिकेशन कराया है या कोई ऐसी एक्सेसरीज लगवाई है जिससे शॉर्ट सर्किट हुआ और इसकी जानकारी कंपनी को नहीं थी, या फिर आपकी कोई बड़ी लापरवाही (जैसे गाड़ी चालू छोड़कर चले जाना) या पॉलिसी का लैप्स होना साबित हो जाता है, तो बीमा कंपनियां आपका क्लेम तुरंत रिजेक्ट (Reject) कर सकती हैं।
हादसे के बाद तुरंत करें ये काम
हादसे के बाद क्लेम पाने की एक तय स्टेप-बाय-स्टेप कानूनी प्रक्रिया होती है, जिसके तहत सबसे पहले खुद को सुरक्षित दूरी पर ले जाकर घटना की तस्वीरें या वीडियो (जो सबूत के तौर पर काम आते हैं) बना लेनी चाहिए, और तुरंत पुलिस तथा फायर ब्रिगेड को सूचित करना चाहिए क्योंकि आगजनी के मामलों में पुलिस की एफआईआर (FIR) या रिपोर्ट क्लेम सेटलमेंट के लिए सबसे अनिवार्य दस्तावेज होती है। इसके फौरन बाद अपनी इंश्योरेंस कंपनी को सूचित कर क्लेम दर्ज कराना होता है, जिसके बाद कंपनी द्वारा भेजा गया सर्वेक्षक (Surveyor) गाड़ी का मुआयना करके आग लगने की असली तकनीकी वजहों की जांच करता है और आपके द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों (पॉलिसी कॉपी, पुलिस रिपोर्ट और तस्वीरों) के आधार पर क्लेम पास करता है।
