क्या फिर लौटेगा Work From Home? ईरान संकट के बीच IEA ने सरकार को दी बड़ी सलाह

आईईए ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया का संघर्ष वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा लेकर आया है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। आम तौर पर हर दिन करीब 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 50 लाख बैरल तेल उत्पाद इस जलडमरूमध्य से गुजरते थे, जो वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत है।

कोरोना महामारी और लॉकडाउन के कारण पहली बार वर्क फ्रॉम होम कल्चर की शुरूआत हुई थी। अब ईरान युद्ध से उपजे तेल संकट ने इसकी वापसी की चर्चा तेज कर दी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने पश्चिम एशिया में व्यवधान के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव के प्रभाव को कम करने के लिए घर से काम और हवाई यात्रा घटाने जैसे कदम उठाने का सुझाव दिया है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले और तेहरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई के बाद तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है और उसके लिए वैश्विक कीमतों में यह उछाल बड़ा व्यापक आर्थिक जोखिम उत्पन्न करता है, चालू खाते के घाटे को बढ़ाता है, रुपये पर दबाव डालता है और घरों व व्यवसायों के लिए ईंधन लागत बढ़ाता है। तेल कंपनियों द्वारा पावर पेट्रोल प्रति लीटर 2 रुपये और रसोई गैस एलपीजी के दाम 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाए गए हैं।

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होर्मुज बंद होने से तेल संकट का खतरा

आईईए ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया का संघर्ष वैश्विक तेल बाजार के इतिहास में सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा लेकर आया है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। आम तौर पर हर दिन करीब 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 50 लाख बैरल तेल उत्पाद इस जलडमरूमध्य से गुजरते थे, जो वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत है। भारत का कच्चे तेल का आधा आयात, 40 प्रतिशत गैस आयात और 85-90 प्रतिशत एलपीजी की आपूर्ति इसी मार्ग से होती थी। आईईए ने कहा कि सप्लाई अब बहुत कम रह गया है। आपूर्ति में कमी का वैश्विक बाजारों पर बड़ा असर पड़ रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं और कुछ परिष्कृत उत्पाद खासतौर पर डीजल, विमान ईंधन तथा एलपीजी की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।

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