RBI Repo Rate Hike Expectation From SBI To BoFA : फरवरी में पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान में जो युद्ध शुरू हुआ उसका असर अब EMI तक आ सकता है। 5-7 अक्टूबर को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक होनी है। भारत से पहले ग्लोबल मार्केट और कैपिटल फ्लो को प्रभावित करने वाले दो केंद्रीय बैंक, US Fed और बैंक ऑफ जापान (BoJ) ब्याज दर बढ़ा चुके हैं।
बोफा ने बदला अनुमान
अब RBI के सामने ब्याज दरों में कटौती की जगह बढ़ोतरी का सवाल खड़ा होता दिख रहा है। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) सिक्योरिटीज ने अपने अनुमान में बड़ा बदलाव करते हुए कहा है कि RBI अक्टूबर से रेट हाइक सायकल शुरू कर सकता है। BofA को अब जून 2027 तक रेपो रेट में में कुल 100 बेसिस पॉइंट यानी 1 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है। वहीं SBI Research ने दिसंबर तक 50 bps की बढ़ोतरी की बात कही है।
अभी कितनी है रेपो रेट?
फिलहाल RBI की नीतिगत दर यानी रेपो रेट 5.25% है। अगस्त की MPC बैठक में इसे लगातार चौथी बार जस का तस रखा गया था। अब अगली MPC बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होगी। अगर ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की गई, तो रेपो रेट बढ़कर 5.50% हो जाएगी। वहीं, अगर 50 आधार अंक की बढ़ोतरी हुई, तो 5.75% होगी।
क्यों बढ़ सकती है ब्याज दर?
रिजर्व बैंक भारतीय इकोनॉमी को स्थिर बनाए रखने के लिए ब्याज दरों में बदलाव करता है। जब, महंगाई बढ़ने लगती है, तो RBI ब्याज दरें बढ़ाकर पूंजी के प्रवाह को कम करता है, जिससे कीमतों पर लगाम लगाई जा सके और महंगाई को रोका जा सके। वहीं, दूसरी तरफ जब ग्रोथ रुकने लगती है, तो ब्याज दर घटाकर बैंक पूंजी प्रवाह बढ़ाती हैं। फिलहाल, महंगाई लगातार RBI के टारगेट रेंज से ऊपर है और टोलरेंस बैंड के आसपास है, जिसकी वजह से ब्याज दर बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।
BofA ने क्यों बदला पूरा अनुमान?
बैंक ऑफ अमेरिका ने पहले RBI से कुल 50 आधार अंक की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया था, लेकिन अब उसने इसे दोगुना कर 100 आधार अंक कर दिया है। BofA के मुताबिक अक्टूबर की बैठक में 25 आधार अंक की पहली बढ़ोतरी हो सकती है। इसके बाद बाकी 75 आधार अंक की बढ़ोतरी H1 2027 तक होने का अनुमान है। इससे रेपो रेट बढ़कर 6.25% तक पहुंच सकता है। बोफा के मुताबिक अनुमान में बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण महंगाई का बदलता माहौल (Inflation Outlook) है। सितंबर के दौरान क्रूड ऑयल $100-110 प्रति बैरल के दायरे में रहा। महंगे तेल ने महंगाई बढ़ाई है, जिससे भारत की इकोनॉमी पर दबाव बढ़ रहा है। यही वजह है कि RBI को अब महंगाई से निपटने के उपाय शुरू करने होंगे।
SBI ने भी दिसंबर तक 50 bps की घंटी बजाई
SBI Research का अनुमान BofA से छोटा है, लेकिन दिशा वही है। SBI Research ने अक्टूबर में 25 bps और दिसंबर में एक और 25 bps Rate Hike की सिफारिश की है। इसके मुताबिक कुल 50 bps की बढ़ोतरी महंगाई के खिलाफ एक तरह का सुरक्षा कवच बन सकती है।
SBI Research की चिंता का बड़ा कारण भी क्रूड ऑयल है। रिपोर्ट के मुताबिक क्रूड अगर 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तो अक्टूबर-नवंबर में CPI Inflation 6.5% या इससे ऊपर जाने का जोखिम बढ़ जाएगा।
महंगाई का चौतरफा हो रहा असर
SBI की रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई का असर अब सिर्फ कुछ चुनिंदा फूड आइटम तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि, Crude का असर अब तमाम पेट्रोलियम प्रोडक्ट के महंगे होने से फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ट्रांसपोर्ट जैसे तमाम सेक्टर पर पड़ रहा है, जिसकी वजह से इनपुट कॉस्ट भी बढ़ रही है और ये कीमतें अब ग्राहकों तक बढ़कर पहुंच रही हैं।
कितनी बढ़ेगी EMI?
Repo Rate में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी का सीधा मतलब यह नहीं है कि हर लोन की EMI उसी दिन से बढ़ जाएगी। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका लोन किस बेंचमार्क से जुड़ा है और बैंक कितनी तेजी से रेट के असर को पास ऑन करता है। Floating Rate, खासकर एक्टर्नल बेंचमार्क से जुड़े लोन पर असर सबसे ज्ल्दी आती है। नीचे 10 लाख और 50 लाख के लोन का पूरा हिसाब दिया गया है।
| Repo Rate/Loan Rate में बदलाव | ₹10 लाख Loan की EMI | ₹50 लाख Loan की EMI |
|---|---|---|
| 8.00% | ₹8,364 | ₹41,822 |
| 8.25% (+25 bps) | ₹8,521 | ₹42,603 |
| 8.50% (+50 bps) | ₹8,678 | ₹43,391 |
| 9.00% (+100 bps) | ₹8,997 | ₹44,986 |
क्या त्योहारी सीजन में लगेगा पहला झटका?
कई ब्रोकरेज और एनालिस्ट मान रहे हैं कि त्योहारी सीजन की जगह रिजर्व बैंक दिसंबर से रेट पर कोई फैसला कर सकता है। फिलहाल, MPC रेट में कोई बदलाव नहीं करे इस बात की संभावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि, त्योहारी सीजन में ब्याज दरें बढ़ाने की वजह से डिमांड पर बड़ा असर हो सकता है, जिसका इकोनॉमी पर व्यापक असर हो सकता है।
