अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज ब्लॉकेज ने भारत को ऊर्जा संकट में ला दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील की है। हालांकि, इस घटानक्रम ने भारत को एक सीख भी दी है कि इस तरह का संकट भविष्य में कभी भी आ सकता है। भारत ने इससे सबक लेते हुए होर्मुज पर निर्भरता खत्म करते हुए तैयारी शुरू कर दी है। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर निर्भरता खत्म करने के लिए ओमान से गुजरात तक अंडरसी गैस पाइपलाइन बिछाने जा रहा है। साथ ही दो और पाइपलाइन पर काम कर रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, खाड़ी देशों से सीधे गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 2,000 किलोमीटर लंबे इस समुद्री पाइपलाइन प्रोजेक्ट को युद्धस्तर पर गति देने में लग गया है।
गैस पाइपलाइन का रूट क्या होगा?
पाइपलाइन का रूट इस तरह से डिजाइन किया जाएगा कि यह ओमान और UAE होते हुए अरब सागर से गुजरे, और उन इलाकों से बचे जो भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं। इससे भारत को ओमान, UAE, सऊदी अरब, ईरान, तुर्कमेनिस्तान और कतर से गैस मिल सकेगी। यह वह इलाका है जहां 2,500 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस के भंडार मौजूद हैं। यह पाइपलाइन 3,450 मीटर तक की गहराई में बिछाई जा सकती है, जिससे यह दुनिया की अब तक की सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइनों में से एक बन जाएगी।
5 से 7 साल का समय लगेगा
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, ओमान से शुरू होने वाली इस अनुमानित ₹40,000 करोड़ (4.7-4.8 अरब डॉलर) की पाइपलाइन परियोजना को पूरा होने में पांच से 7 साल लगेंगे। इससे पहले सरकार ने सरकारी कंपनी गेल, इंजीनियर्स इंडिया और इंडियन ऑयल कॉर्प को विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है।
लगातार बढ़ रही गैस की मांग
भारत में प्राकृतिक गैस की मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि ऊर्जा की भारी जरूरत वाला यह देश अपनी प्राथमिक ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। मौजूदा खपत लगभग 190-195 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रति दिन (mmscmd) है और अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर लगभग 290-300 mmscmd तक पहुंच जाएगी।
होर्मुज पर अभी बहुत ज्यादा निर्भरता
गैस सप्लाई के लिए अभी भारत की होर्मुज पर बहुत अधिक निर्भरता है। 2025 में भारत के लगभग दो-तिहाई LNG आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरे। जब फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बाद ईरान ने इस रास्ते को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया, तो वैश्विक LNG आपूर्ति में 20% से ज्यादा की गिरावट आई, जिससे कीमतों में भारी उछाल आ गया। एशियाई स्पॉट LNG की कीमतें, जिन्हें Platts JKM बेंचमार्क से मापा जाता है, हाल के वर्षों में तेज़ी से ऊपर-नीचे हुई हैं। स्थिर समय में जो कीमतें $10-12 प्रति MMBtu के आसपास थीं, वे भू-राजनीतिक संकट के कारण बढ़कर $24-25 प्रति MMBtu तक पहुंच गईं।
तीन नए समुद्री पाइपलाइन पर काम शुरू
भारत ने होर्मुज संकट के बाद यह समझ लिया है कि किसी एक समुद्री रास्ते पर निर्भर रहना अब ठीक नहीं है। यह अब राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी हो गया है। भारत दशकों से ओमान पाइपलाइन पर चर्चा कर रहा है, लेकिन अब होर्मुज़ संकट ने इसे धरातल पर उतारने के लिए मजबूर कर दिया है। इसके अलावा दो और पाइपलाइन को शुरू करने पर काम कर
रहा है।
1. ओमान-भारत डीपवाटर पाइपलाइन
सबसे महत्वाकांक्षी प्रस्तावों में से एक ओमान-भारत डीपवाटर मल्टीपर्पज पाइपलाइन (OIDMPP) है। इस परियोजना पर चर्चा 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुई थी। यह पाइपलाइन ओमान के रास अल जिफान से गुजरात के पोरबंदर तक समुद्र के तल से होकर गुजरेगी, जो कुछ हिस्सों में 3,500 मीटर की गहराई तक जाएगी। मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस के परिवहन के लिए डिजाइन की गई यह पाइपलाइन ज़मीनी सीमाओं और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों से बचकर निकलेगी।
2. भारत-श्रीलंका तेल पाइपलाइन
यह भारत-श्रीलंका क्रॉस-बॉर्डर तेल पाइपलाइन है। इस परियोजना के लिए बातचीत 2026 में फिर से शुरू हुई, जिसमें भारत, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। हाल ही में अप्रैल 2026 में, भारत के उपराष्ट्रपति और श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कोलंबो में इस पर चर्चा की।
3. तापी (TAPI) गैस पाइपलाइन
तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत (TAPI) गैस पाइपलाइन वह परियोजना है जिसमें हाल ही में प्रगति देखी गई है, लेकिन इसका पूर्ण कार्यान्वयन अभी भी अनिश्चित है। 1,814 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन तुर्कमेनिस्तान के विशाल 'गाल्किनिश' क्षेत्र से दक्षिण एशिया तक सालाना 33 बिलियन क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस लाने का लक्ष्य है।
Oman Gas Pipeline
गैस भंडारण करने में हम पीछे
पाइपलाइनों के साथ-साथ, नीति-निर्माता गैस भंडारण की कमी को लेकर एक बड़ी समस्या की ओर इशारा कर रहे हैं। कच्चे तेल जैसा, भारत के पास गैस का लगभग कोई रणनीतिक भंडार नहीं है, जिससे वह अस्थिर स्पॉट बाजारों के सामने खुला रह जाता है और संकट के समय सस्ती गैस का भंडारण करने में असमर्थ रहता है। वर्तमान में, भारत के पास रीगैसिफिकेशन टर्मिनलों पर 22-24 LNG भंडारण टैंक हैं, जिनकी अनुमानित भंडारण क्षमता लगभग 2-2.5 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है। यह मात्रा देश की गैस खपत के केवल 10-12 दिनों के बराबर है।
चीन पाइपलाइन नेटवर्क में बहुत आगे
भारत के मुकाबले चीन पाइपलाइन नेटवर्क में बहुत आगे है। बीजिंग ने पिछले दो दशकों में कई ज़मीनी पाइपलाइन गलियारे तैयार किए हैं, जिसने उसे होर्मुज संकट जैसे झटकों से सुरक्षित रखा है।
रूस-चीन कॉरिडोर: 'पावर ऑफ़ साइबेरिया' पाइपलाइन 2019 से चालू है, जो सालाना 38 BCM गैस पहुंचाती है।
मध्य एशिया नेटवर्क: तुर्कमेनिस्तान से चीन की तीन समानांतर पाइपलाइनें पहले से ही 55 BCM गैस की आपूर्ति कर रही हैं। चौथी लाइन के साथ यह क्षमता जल्द ही 85 BCM हो जाएगी।
रणनीतिक भंडारण क्षमता
चीन की गैस भंडारण क्षमता 2026 के अंत तक 80 BCM पहुंचने की उम्मीद है, जो उसकी वार्षिक खपत का 20% है। इसके विपरीत, भारत के पास वर्तमान में ऐसा कोई तुलनात्मक रणनीतिक गैस भंडार नहीं है, जो संकट के समय सुरक्षा दे सके।
Gas Supply.
आम आदमी को क्या फायदा होगा?
होर्मुज तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और तेल की कीमतें आसमान छू रही है। इसका सीधा असर भारत के आयात बिल पर हुआ है। सरकार ने कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में बड़ी बढ़ोतरी की है।कभी भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं। अगर पाइपलाइन होता तो ऐसी नौबत नहीं आती।
सस्ती गैस: पाइपलाइन से आने वाली गैस LNG के मुकाबले काफी सस्ती होगी।
स्थिरता: युद्ध या अंतरराष्ट्रीय तनाव के बावजूद भारत में गैस की सप्लाई नहीं रुकेगी।
औद्योगिक विकास: हमारे खाद कारखानों और बिजली घरों को चौबीसों घंटे ईंधन मिलेगा।
