BRICS Common Currency : दुनिया के तेजी से उभरते देशों के संगठन ब्रिक्स (BRICS) की अपनी अलग मुद्रा (करेंसी) शुरू करने की चर्चाओं पर भारत ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह ब्रिक्स देशों के लिए किसी नई साझा करेंसी को लाने की योजना के बिल्कुल समर्थन में नहीं है। इस बयान के बाद अब यह साफ हो गया है कि निकट भविष्य में ब्रिक्स की कोई नई साझा मुद्रा (BRICS Currency) आने की संभावना नहीं के बराबर है।
ब्रिक्स की अलग मुद्रा आएगी या नहीं? भारत ने दिया बड़ा बयान
भारत का स्पष्ट रुख: नई करेंसी के पक्ष में नहीं
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक जयपुर में आयोजित ब्रिक्स देशों के व्यापार एवं उद्योग मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक के समापन के बाद भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मीडिया को संबोधित करते हुए देश का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी तरह की नई 'ब्रिक्स मुद्रा' के पक्ष में नहीं है। गोयल ने जोर देकर कहा कि भारत ऐसी किसी भी योजना का खुलकर विरोध करता है और इसके समर्थन में कोई कदम नहीं उठाएगा।
क्यों उठ रही थी अलग करेंसी की मांग?
पिछले कुछ सालों से ब्रिक्स के प्रमुख सदस्य देश, विशेष रूप से रूस और चीन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अमेरिकी डॉलर के दबदबे को कम करने के विकल्प तलाश रहे थे। ये देश अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए एक साझा ब्रिक्स करेंसी की संभावनाओं पर लगातार चर्चा कर रहे थे। हालांकि, भारत के इस कड़े रुख के बाद अब इस विचार को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि ब्रिक्स के किसी भी बड़े फैसले के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति होना बेहद जरूरी है।
अमेरिकी डॉलर और वैश्विक राजनीति की भूमिका
ब्रिक्स करेंसी को लेकर यह बयान वैश्विक राजनीति के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ब्रिक्स देशों को चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने अमेरिकी डॉलर को रिप्लेस करने या उसकी जगह कोई दूसरी मुद्रा लाने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ सख्त आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं। ऐसे माहौल में भारत का यह बयान अंतरराष्ट्रीय व्यापार संतुलन और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक विचारशील कदम माना जा रहा है।
बैठक में किन मुद्दों पर बनी सहमति?
अलग करेंसी की योजना को खारिज करने के साथ ही मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि इस दो दिवसीय बैठक में सदस्य देशों के बीच व्यापार को अधिक संतुलित और सुगम बनाने पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक का मुख्य फोकस आपस में निवेश बढ़ाना और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSMEs) को आसानी से पर्याप्त फंड और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना था, ताकि सभी देशों की अर्थव्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल सके।
क्या है ब्रिक्स समूह?
ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रभावशाली समूह है। इसमें भारत, ब्राजील, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे 11 देश शामिल हैं। यह मंच वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर के महत्वपूर्ण आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर आपसी सहयोग और विचार-विमर्श के लिए काम करता है।
