शेयर बाजार निवेशकों के लिए पिछला दो साल खराब रहा है। वैश्विक हालात ने भारतीय स्टॉक मार्केट को प्रभावित किया है, जिससे निवेशकों को मामूली या निगेटिव रिटर्न मिला है। हालांकि, जुलाई के बाद अब अगस्त में शेयर बाजार से बेहतर रिटर्न की उम्मीद जगी है। अमेरिका और ईरान में शांति की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमत में गिरावट से वैश्विक हालात भी बेहतर हुए हैं। ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो अगस्त का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छा रहा है। आइए जानते हैं कि शेयर बाजार के इतिहास से क्या मिल रहे हैं संकेत?
शेयर बाजार आउटलुक
पिछले 10 सालों में से छह बार मिला पॉजिटिव रिटर्न
इतिहास के हिसाब से, जुलाई और अगस्त भारतीय इक्विटी के लिए सबसे अच्छे महीनों में से हैं। JM फाइनेंशियल के डेटा के मुताबिक, निफ्टी 50 इंडेक्स ने अगस्त के महीने में पॉजिटिव ट्रेंड दिखाया है और पिछले 10 सालों में से छह बार बढ़त दर्ज की है, जिसमें रिटर्न 1.4% रहा है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के डेटा के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में निफ्टी 50 और निफ्टी 500 में छह बार बढ़त देखी गई है, जिसमें औसत बढ़त क्रमशः 1.4% और 1.7% रही है।
वहीं, ब्लूमबर्ग के डेटा के अनुसार, इस अवधि के दौरान निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 250 में भी क्रमशः सात और छह बार बढ़त दर्ज की गई। जुलाई में निफ्टी 0.3% चढ़कर 24,383 पर बंद हुआ, जबकि महीने के दौरान NSE बेंचमार्क में 2.2% की बढ़त हुई।
विदेशी निवेशकों की भी हुई वापसी
जुलाई में, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹10,000 करोड़ से अधिक मूल्य के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। फरवरी के बाद यह शुद्ध खरीदारी का पहला महीना था। जुलाई में निफ्टी मिडकैप 100 में 1.8%, स्मॉलकैप 250 में 1.1% और निफ्टी 500 में 2% की बढ़त हुई।
अगस्त में इन घटनाक्रमों पर रहेगी निवशकों की नजर
1. कमाई (अर्निंग्स): निवेशकों की नजर कंपनियों की कमाई पर रहेगी। अच्छी कमाई वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिल सकती है।
2. मानसून: अच्छा मानसून ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खेती की पैदावार और महंगाई पर सीधा असर डालता है। इसलिए निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बारिश कैसी हो रही है। इससे कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग का अंदाजा लगेगा।
3. RBI MPC का फैसला: अगस्त के पहले हफ्ते में होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर भी बाजार की नजर रहेगी।
4. कच्चे तेल की कीमत: कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, दुनिया में चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रम और MSCI इंडेक्स में होने वाले बदलाव भी शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। इसके अलावा बॉन्ड यील्ड, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और महंगाई से जुड़े संकेतों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
(डिस्क्लेमर: यह स्टोरी केवल जानकारी के उद्देश्यों के लिए है। कोई भी निवेश अपने फाइनेंशियल एक्सपर्ट की सलाह पर ही करें। )
