सैलरी बढ़ने के बाद भी क्यों नहीं हो रही सेविंग? क्या है लाइफस्टाइल इंफ्लेशन और आप कैसे बच सकते हैं इससे

यह एक ऐसा साइलेंट किलर है जो आपकी तरक्की के बावजूद आपको कभी अमीर नहीं बनने देता। आइए समझते हैं कि यह क्या है और आप कैसे अपनी बढ़ी हुई सैलरी को फालतू खर्चों की भेंट चढ़ने से बचा सकते हैं।

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि जैसे ही ऑफिस में आपका इंक्रीमेंट होता है या प्रमोशन मिलता है, महीने के अंत में आपका बैंक बैलेंस पहले जैसा ही 'जीरो' रहने लगता है? हम अक्सर सोचते हैं कि सैलरी बढ़ेगी तो हम ज्यादा बचत करेंगे और बेहतर निवेश करेंगे, लेकिन असल में हमारे खर्चे हमारी इनकम से भी तेज रफ्तार में बढ़ने लगते हैं। फाइनेंस की दुनिया में इसको 'लाइफस्टाइल इंफ्लेशन' (Lifestyle Inflation) कहा जाता है। यह एक ऐसा साइलेंट किलर है जो आपकी तरक्की के बावजूद आपको कभी अमीर नहीं बनने देता। आइए समझते हैं कि यह क्या है और आप कैसे अपनी बढ़ी हुई सैलरी को फालतू खर्चों की भेंट चढ़ने से बचा सकते हैं।

Lifestyle Inflation

क्या है लाइफस्टाइल इंफ्लेशन?

आसान शब्दों में कहें तो जैसे-जैसे आपकी कमाई बढ़ती है, वैसे-वैसे अपनी जीवनशैली को और ज्यादा शानदार बनाने की इच्छा भी बढ़ती जाती है। पहले आप साधारण चाय की दुकान पर जाते थे, लेकिन सैलरी बढ़ते ही आपको 'स्टारबक्स' की कॉफी पसंद आने लगती है। पहले आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अब आपको छोटी दूरी के लिए भी लग्जरी कैब या खुद की बड़ी गाड़ी की जरूरत महसूस होने लगती है। लाइफस्टाइल इंफ्लेशन इसी मानसिकता का नाम है जहाँ 'जरूरतें' (Needs) धीरे-धीरे 'ख्वाहिशों' (Wants) में बदल जाती हैं। लोग अपनी बढ़ी हुई इनकम को बेहतर भविष्य के लिए निवेश करने के बजाय मौजूदा दिखावे पर खर्च करने लगते हैं।

End of Feed