Why UAE Left OPEC: यूएई ने क्यों छोड़ा ओपेक? कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर क्या होगा असर

Why UAE Left OPEC: UAE ने OPEC और OPEC+ के संगठनों से बाहर निकलने का ऐलान कर दिया है। इस कदम से समूह के वास्तविक लीडर, सऊदी अरब को एक बड़ा झटका लग सकता है।

Why UAE Left OPEC: ओपेक (Organization of the Petroleum Exporting Countries OPEC) और OPEC+ एक ऐसा संगठन है जो दुनिया भर में कच्चे तेल के उत्पादन और उसकी कीमतों को नियंत्रित करता है। यूएई लंबे समय से इसका एक अहम सदस्य रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से सऊदी अरब के नेतृत्व वाले इस संगठन और यूएई के बीच दूरियां बढ़ रही थीं। यूएई का मानना है कि ओपेक द्वारा लगाए गए उत्पादन कट (Production Cuts) के नियम उसकी अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह साबित हो रहे हैं। यूएई ने अपनी तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश किया है और वह अधिक तेल बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था को और मजबूत करना चाहता है, लेकिन ओपेक के नियम उसे ऐसा करने से रोक रहे थे। यह फैसला खाड़ी परिषद (GCC) के साथ चल रहे तनाव के बीच आया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के इस कदम से समूह के वास्तविक लीडर, सऊदी अरब को एक बड़ा झटका लग सकता है। ओपेक (OPEC) के पुराने सदस्य यूएई की विदाई से संगठन के भीतर असंतुलन पैदा हो सकता है और यह समूह कमजोर पड़ सकता है। अब तक जियोपॉलिटिक्स से लेकर प्रोडक्शन कोटा जैसे कई अंदरूनी मतभेदों के बावजूद यह ग्रुप एकजुटता दिखाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन इस फैसले से वह एकता अब खतरे में नजर आ रही है।

Why UAE Left OPEC

क्यों UAE ने छोड़ा OPEC और OPEC+?

यूएई की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह 'उत्पादन कोटा' है। ओपेक अक्सर तेल की कीमतें ऊंची रखने के लिए सभी सदस्य देशों को कम तेल निकालने का आदेश देता है। यूएई का तर्क है कि उसकी क्षमता अब बहुत बढ़ चुकी है और उसे पुराना कोटा दिया जा रहा है, जो कि नाइंसाफी है। यूएई अपनी आय बढ़ाना चाहता है ताकि वह तेल पर अपनी निर्भरता कम कर सके और पर्यटन व तकनीक जैसे क्षेत्रों में निवेश कर सके। सऊदी अरब के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय वर्चस्व की जंग ने इस अलगाव को और हवा दी है।

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