प्लेटफार्म टिकट सिर्फ 2 घंटे का ही क्यों होता है? रेलवे ने कैसे तय किया ये समय?

रेलवे नियमों के अनुसार, प्लेटफॉर्म टिकट की वैधता आमतौर पर केवल 2 घंटे की होती है। इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि कोई व्यक्ति यात्री को ट्रेन तक छोड़ने या उसे स्टेशन से लेने के लिए अंदर जा सके।

भारतीय रेलवे (Indian Railway) को हमारे देश की लाइफलाइन कहा जाता है, जिससे हर दिन करोड़ों लोग सफर करते हैं। जब भी हम अपने किसी रिश्तेदार या दोस्त को ट्रेन में बैठाने या उन्हें स्टेशन से लेने जाते हैं, तो स्टेशन परिसर और प्लेटफार्म पर प्रवेश करने के लिए हमें एक 'प्लेटफार्म टिकट' (Platform Ticket) खरीदना पड़ता है। वर्तमान में इसकी कीमत अमूमन 10 रुपए होती है। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि इस टिकट पर एक समय सीमा लिखी होती है? भारतीय रेलवे के नियमों के मुताबिक, एक प्लेटफार्म टिकट खरीदने के बाद आप स्टेशन पर सिर्फ 2 घंटे तक ही रुक सकते हैं। इसके बाद वह टिकट अमान्य हो जाता है। बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर रेलवे ने यह 2 घंटे का ही समय क्यों तय किया है और इसके पीछे क्या वजह है?

Platform Ticket

2 घंटे की क्यों होती है प्लेटफॉर्म टिकट

प्लेटफार्म टिकट की समय सीमा 2 घंटे तय करने के पीछे रेलवे का सबसे मुख्य और बड़ा कारण है स्टेशनों पर भीड़ को नियंत्रित करना (Crowd Management)। भारत के रेलवे स्टेशनों पर, विशेषकर बड़े और प्रमुख स्टेशनों पर, यात्रियों की संख्या हर समय बहुत ज्यादा होती है। अगर प्लेटफार्म टिकट की कोई समय सीमा तय न की जाए या इसे पूरे दिन के लिए वैध कर दिया जाए, तो लोग बिना किसी काम के भी घंटों प्लेटफार्म पर बैठे रहेंगे। इससे स्टेशन पर इतनी ज्यादा भीड़ हो जाएगी कि असली यात्रियों को ट्रेन पकड़ने, अपनी बोगी ढूंढने या स्टेशन से बाहर निकलने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। 2 घंटे की समय सीमा यह सुनिश्चित करती है कि लोग अपने परिजनों को छोड़ने या लेने के बाद ज्यादा देर तक प्लेटफार्म पर न रुकें और तुरंत स्टेशन से बाहर चले जाएं, जिससे प्लेटफार्म पर केवल जरूरी लोग ही मौजूद रहें।

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