AI का फिलहाल सबसे ज्यादा असर बड़ी टेक कंपनियों पर देखने को मिल रहा है। US के साथ ही दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल IBM के शेयरों में बड़ी ताबाही देखने को मिली है। सोमवार को US Market में एक ही दिन में 13% से ज्यादा की गिरावट आई। यह इस स्टॉक में दो दशक की सबसे बड़ी गिरावट है। वहीं, अगर पूरे एक महीने का हिसाब देखें, तो 60 साल की सबसे बड़ी गिरावट इसमें आ चुकी है।
आईटी शेयरों में फिर ताबही (इमेज क्रेडिट कैन्वा)
IBM के स्टॉक में आई यह गिरावट एंथ्रोपिक के AI प्रोग्राम्स का नतीजा ही बताई जा रही है। एंथ्रोपिक के COO का कहना है उनके एजेंटिक AI के जरिये 2030 तक दुनिया की 50 फीसदी एंट्री लेवल व्हाइट कॉलर जॉब्स को रिप्लेस किया जा सकता है। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि IBM ने कुछ दिन पहले ही ऐलान किया है कि कंपनी एंट्री लेवल की हायरिंग में 3 गुना बढ़ोतरी करने जा रही है।
क्यों आई IBM के शेयर में गिरावट?
Anthropic ने दावा किया कि उसका Claude Code टूल COBOL आधारित सिस्टम्स के मॉडर्नाइजेशन को ऑटोमेट कर सकता है। COBOL पर चलने वाले ज्यादातर मेनफ्रेम IBM के हैं। दशकों से COBOL अपग्रेड के लिए बड़ी कंसल्टिंग टीमें लगती थीं। अब AI के जरिए कोड एनालिसिस और माइग्रेशन तेज और सस्ता हो सकता है। यही IBM के मेनफ्रेम बिजनेस मॉडल के लिए जोखिम माना गया। निवेशकों को डर है कि AI “वाइब कोडिंग” के जरिए लेगेसी सॉफ्टवेयर पर निर्भरता घटा सकता है।
निफ्टी आईटी पर असर
International Business Machines (IBM) की गिरावट ने पूरे ग्लोबल टेक स्पेस में AI-डिसरप्शन का डर बढ़ा दिया। NIFTY IT पर भी इसका असर दिखा है, क्योंकि भारतीय IT कंपनियों को IBM के COBOL मॉडर्नाइजेशन और लेगेसी सिस्टम अपग्रेड और मेंटेनेंस जैसे काम के लिए
बड़ा रेवेन्यू मिलता है। लेकिन, AI के चलते यह काम बेदह कम लागत में हो पाएगा, जिससे बिलिंग मॉडल, मार्जिन और मल्टी-ईयर डील्स पर दबाव की चिंता बढ़ गई है।
| शेयर | गिरावट (%) |
|---|---|
| Infosys | -3.05% |
| Tata Consultancy Services | -2.56% |
| HCL Technologies | -3.70% |
| Tech Mahindra | -3.26% |
| Wipro | -1.79% |
| Persistent Systems | -4.99% |
| Coforge | -4.75% |
1. लेगेसी मॉडर्नाइजेशन पर दबाव : भारतीय IT कंपनियों का बड़ा रेवेन्यू बैंकिंग, इंश्योरेंस और गवर्नमेंट सेक्टर में लेगेसी सिस्टम मॉडर्नाइजेशन से आता है। यदि AI टूल्स यह काम तेजी से और कम लागत में कर दें, तो बिलिंग मॉडल प्रभावित हो सकता है।
2. मार्जिन और प्राइसिंग पावर : अगर क्लाइंट AI टूल्स से खुद कोड जेनरेट या माइग्रेट कर पाएंगे, तो बड़े मल्टी-ईयर कॉन्ट्रैक्ट्स की जरूरत कम हो सकती है। इससे मार्जिन दबाव में आ सकते हैं।
3. ‘कंसल्टिंग आर्मी’ मॉडल पर असर : COBOL जैसी पुरानी लैंग्वेज पर काम करने वाली बड़ी टीमों की जरूरत घट सकती है। इससे हेडकाउंट-आधारित रेवेन्यू मॉडल पर सवाल उठेंगे।
क्या डर वाजिब है?
IBM खुद 2023 में AI आधारित COBOL मॉडर्नाइजेशन टूल लॉन्च कर चुका है। कंपनी के CEO ने कहा था कि ग्राहकों में इसका अच्छा एडॉप्शन है। कई एनालिस्ट मानते हैं कि मेनफ्रेम से माइग्रेशन का विकल्प पहले भी था, फिर भी बड़े बैंक और सरकारी संस्थान स्थिरता के कारण उसी प्लेटफॉर्म पर बने रहे हैं। लेकिन, फिलहाल बाजार का मूड “Sell First, Ask Later” जैसा दिख रहा है। AI डिसरप्शन थीम ने पूरे ग्लोबल सॉफ्टवेयर सेक्टर को हिला दिया है। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो भारतीय IT स्टॉक्स में वैल्यूएशन डी-रेटिंग संभव है। हालांकि, लंबी अवधि में जो कंपनियां AI को अपने सर्विस मॉडल में तेजी से इंटीग्रेट करेंगी, वही बढ़त बनाए रखेंगी।
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