Gold-Silver Prices: सोने-चांदी की कीमतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस पर संसद में सरकार ने कहा है कि हाल के दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में जो तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है, उसका सबसे बड़ा कारण दुनिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक हालात को लेकर अनिश्चितता है। जब दुनिया में युद्ध, तनाव या आर्थिक संकट का डर बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं। सोना और चांदी को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए इनकी मांग बढ़ जाती है और कीमतें ऊपर चली जाती हैं।
सोने-चांदी की कीमतों में तेजी क्यों? (तस्वीर-istock)
अंतरराष्ट्रीय कीमतों से तय होती हैं घरेलू दरें
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि भारत में सोने और चांदी की कीमतें सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी होती हैं। इनकी घरेलू कीमतें मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर करती हैं अंतरराष्ट्रीय बाजार में चल रही कीमतें, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की विनिमय दर और भारत में लगने वाले टैक्स व शुल्क। अगर डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो आयात महंगा पड़ता है और कीमतें बढ़ जाती हैं।
केंद्रीय बैंकों की खरीद से बढ़ी मांग
मंत्री ने यह भी बताया कि हालिया उछाल में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों और बड़े वित्तीय संस्थानों की भूमिका भी अहम है। कई देशों के केंद्रीय बैंक बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं, ताकि अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत कर सकें। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की मांग और बढ़ गई है, जिसका असर भारत समेत अन्य देशों में भी कीमतों के रूप में दिख रहा है।
हर वर्ग पर असर अलग-अलग
सरकार का कहना है कि सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सभी राज्यों और लोगों पर एक जैसा नहीं होता। भारत में सोने-चांदी का सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व है। कुछ राज्यों और समुदायों में इसका ज्यादा इस्तेमाल होता है, जैसे शादी-ब्याह और त्योहारों में। इसलिए कीमतें बढ़ने से कुछ लोगों पर ज्यादा असर पड़ता है।
निवेश और उपभोग दोहरी भूमिका
सोना और चांदी केवल गहनों या सजावट के लिए ही नहीं खरीदे जाते, बल्कि इन्हें निवेश का एक महत्वपूर्ण साधन भी माना जाता है। अनिश्चित समय में लोग अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए इन धातुओं में निवेश करते हैं। मंत्री ने कहा कि कीमतें बढ़ने से उन लोगों को फायदा होता है, जिनके पास पहले से सोना या चांदी मौजूद है, क्योंकि उनकी संपत्ति का मूल्य कागजों पर बढ़ जाता है।
सरकार कीमतें तय नहीं करती
पंकज चौधरी ने साफ किया कि सोने और चांदी की कीमतें बाजार की ताकतों से तय होती हैं। सरकार इनकी कीमतें निर्धारित नहीं करती और न ही सीधे इसमें हस्तक्षेप करती है। मांग और आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय हालात और मुद्रा विनिमय दर जैसे कारक ही इनकी कीमतों को प्रभावित करते हैं।
सोना-चांदी का बढ़ता आयात
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में सितंबर महीने तक भारत ने 26.51 अरब अमेरिकी डॉलर का सोना और 3.21 अरब अमेरिकी डॉलर की चांदी का आयात किया है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि ऊंची कीमतों के बावजूद भारत में सोने-चांदी की मांग बनी हुई है, जो इनके सामाजिक और आर्थिक महत्व को दर्शाती है।
