15 अगस्त 1947 को जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ, तब दोनों देशों के सामने गरीबी, भुखमरी और प्रशासनिक चुनौतियों जैसी एक जैसी समस्याएं थीं। लेकिन आजादी के आठ दशकों के बाद, आज दोनों देशों की स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर आ चुका है। जहां भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक मंच पर एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है, वहीं पाकिस्तान लगातार राजनीतिक अस्थिरता, भारी विदेशी कर्ज और आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
अर्थव्यवस्था, सेना और स्पेस में पाकिस्तान से कितना आगे है भारत
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर कितना आगे है भारत ?
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर दोनों देशों की तुलना करें तो भारत का दबदबा पूरी तरह साफ नजर आता है। भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छू रही है, जो दुनिया में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसके मुकाबले पाकिस्तान की जीडीपी 350-400 बिलियन डॉलर के आसपास ही सिमटी हुई है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) जहां रिकॉर्ड 600 बिलियन डॉलर से अधिक है, वहीं पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार महज कुछ बिलियन डॉलर बचा है, जिसके लिए उसे बार-बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और मित्र देशों से कर्ज मांगना पड़ता है। प्रति व्यक्ति आय और औद्योगिक विकास के मामले में भी भारत काफी आगे निकल चुका है।
सेना में कौन आगे?
सैन्य शक्ति के मामले में भी भारत दुनिया की चौथी सबसे शक्तिशाली सेना रखता है। भारत का रक्षा बजट पाकिस्तान के मुकाबले छह से सात गुना ज्यादा है, जिससे भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना के पास आधुनिक और उन्नत हथियार मौजूद हैं। भारत ने रक्षा क्षेत्र में 'आत्मनिर्भरता' को बढ़ावा दिया है, जिससे देश में ही 'तेजस' जैसे फाइटर जेट, 'आईएनएस विक्रांत' जैसे स्वदेशी विमानवाहक पोत और अत्याधुनिक मिसाइलों का निर्माण हो रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान की सेना काफी हद तक विदेशी मदद और पुराने हथियारों पर निर्भर है, और उसका बड़ा बजट देश की अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ता है।
टेक्नोलॉजी और स्पेस में कौन आगे?
अंतरिक्ष और तकनीक (Space and Technology) के क्षेत्र में भारत की सफलता वैश्विक स्तर पर मिसाल बन चुकी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान-3 के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराया, मंगलयान को पहली ही कोशिश में मंगल की कक्षा में पहुंचाया और सूर्य का अध्ययन करने के लिए आदित्य-L1 लॉन्च किया। इसके अलावा, भारत अब कमर्शियल सैटेलाइट्स की लॉन्चिंग का बड़ा ग्लोबल हब बन चुका है। इसके विपरीत, पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी 'सुपारको' (SUPARCO), जो इसरो से भी पहले बनी थी, वित्तीय संकट और विजन की कमी के कारण बेहद पिछड़ चुकी है और अपने सैटेलाइट्स के लिए भी दूसरे देशों पर निर्भर है।
