Pakistan Oil Reserve: पाकिस्तान में तेल की चर्चा आमतौर पर तब होती है जब वहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ती हैं। लेकिन हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और पाकिस्तान मिलकर वहां के विशाल तेल भंडार को विकसित करेंगे और संभव है कि पाकिस्तान एक दिन भारत को भी तेल बेचे। इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या वाकई पाकिस्तान के पास इतना बड़ा तेल भंडार है?
Pakistan Oil Reserve (Pic Credit: iStock)
क्या पाकिस्तान के पास है तेल का कुआं?
हालांकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। अभी तक पाकिस्तान के पास किसी भी बड़े तेल भंडार की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) और वर्ल्डोमीटर के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान के पास 2016 तक कुल 353.5 मिलियन बैरल तेल का भंडार था, जो दुनिया के कुल भंडार का केवल 0.021 प्रतिशत है। इस आधार पर पाकिस्तान दुनिया में 52वें स्थान पर आता है। वहीं, देश में रोजाना करीब 88,000 बैरल तेल का उत्पादन होता है, जबकि जरूरत करीब 5.56 लाख बैरल प्रतिदिन की है। ऐसे में पाकिस्तान को अपनी खपत का लगभग 85 फीसदी तेल आयात करना पड़ता है।
ट्रंप के बयान की वजह पाकिस्तान के सिंधु बेसिन क्षेत्र में हुए हालिया सर्वेक्षण भी हो सकते हैं। कुछ समुद्री इलाकों में हाइड्रोकार्बन (तेल और गैस) वाली संरचनाएं मिलने के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। इन क्षेत्रों में खुदाई या व्यावसायिक स्तर पर कोई उत्पादन शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगा कि वहां वाकई में कोई बड़ा तेल भंडार है।
कई साल से चल रही है खोज
इतना ही नहीं, पाकिस्तान में पहले भी इस तरह के दावे किए जा चुके हैं। मार्च 2019 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने यह दावा किया था कि कराची के पास समुद्री क्षेत्र में एशिया का सबसे बड़ा तेल और गैस भंडार मिला है। लेकिन कुछ घंटों के भीतर ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस दावे का खंडन कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक्सॉनमोबिल और अन्य कंपनियों द्वारा 5,500 मीटर तक खुदाई के बावजूद कोई तेल या गैस नहीं मिला। बाद में खुदाई का काम रोक दिया गया।
अगर पाकिस्तान को अपने समुद्री तेल भंडारों का विकास करना है, तो इसके लिए भारी पूंजी और लंबा समय चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल पुष्टि और शुरुआती विकास में ही करीब 5 अरब डॉलर और 4-5 साल लग सकते हैं। इसके अलावा रिफाइनरी, पाइपलाइन और बंदरगाह जैसे बुनियादी ढांचे पर भी भारी निवेश करना होगा। फिलहाल पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है। देश पर 126 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है और साल 2023 में उसका ऊर्जा आयात बिल 17.5 अरब डॉलर के पार पहुंच गया था।
पहले भी हो चुकी है तेल के कुंए की खोज
इतिहास की बात करें तो पाकिस्तान में कुछ पुराने तेल क्षेत्रों की खोज जरूर हुई है। पंजाब में 1960 के दशक में टूट ऑयलफील्ड की खोज हुई थी, जहां लगभग 6 करोड़ बैरल तेल होने का अनुमान था। हालांकि इसमें से सिर्फ 12-15% तेल ही निकाला जा सका। इसके अलावा लोअर सिंध फील्ड्स और सुई गैस फील्ड जैसे क्षेत्र हैं, लेकिन ये देश की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
अब सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान वाकई भारत को तेल बेच सकेगा? इस पर विशेषज्ञों की राय है कि फिलहाल ऐसा मुमकिन नहीं है। भारत पहले से ही मिडिल ईस्ट और रूस जैसे देशों से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीद रहा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान के पास न तो पर्याप्त उत्पादन है और न ही ऐसा ढांचा, जिससे वह तेल का निर्यात कर सके। साथ ही, भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक और राजनीतिक रिश्ते भी बेहद संवेदनशील हैं, जो इस संभावना को और भी कमजोर बना देते हैं।
