Rupee fall, Big challenge for policy makers: भारत में रुपये की डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। 13 जनवरी को रुपया 86.70 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे कम मूल्य है। EY के मुख्य नीति सलाहकार डी. के. श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार आगामी बजट 2025 में आयात शुल्क बढ़ाने पर विचार कर सकती है ताकि आयातकों की डॉलर मांग पर अंकुश लगे और रुपये की स्थिरता बहाल हो सके।
"क्या बजट 2025 में आयात शुल्क बढ़ाएगी सरकार?
आयात शुल्क बढ़ाने का तर्क
डी. के. श्रीवास्तव के अनुसार, आयात शुल्क में बढ़ोतरी से आयात कम होगा, जिससे डॉलर की मांग घटेगी। घरेलू उद्योगों को संरक्षण मिलेगा। राजस्व बढ़ने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा, "आयात शुल्क में संशोधन घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित कर सकता है और आयात पर निर्भरता को कम करेगा।"
डॉलर और यूरोपीय मुद्राओं पर समान दबाव
श्रीवास्तव ने बताया कि न केवल रुपया, बल्कि अन्य यूरोपीय मुद्राएं भी इसी तरह के दबाव का सामना कर रही हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार के कारण वित्तीय संसाधन अमेरिका का रुख कर रहे हैं, जिससे अन्य देशों की मुद्राओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
भारत में रुपये की डॉलर के मुकाबले भारी गिरावट
रुपये में गिरावट के आँकड़े
13 जनवरी को रुपया एक सत्र में 66 पैसे की गिरावट के साथ 86.70 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले दो वर्षों में एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट थी। रुपये ने 30 दिसंबर को 85.52 के स्तर पर बंद होने के बाद दो सप्ताह में एक रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की है।
आत्मनिर्भर भारत और नीति सुधार
श्रीवास्तव ने जोर दिया कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ने के लिए घरेलू उद्योगों को और अधिक सुरक्षा प्रदान करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आयात शुल्क बढ़ाने से भारतीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और घरेलू उत्पादन में वृद्धि होगी।
भाषा इनपुट के साथ
