FIIs selling: आज से दो साल पहले तक विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय शेयर बाजार सबसे आकर्षक बाजारों में से एक था। इसलिए कोरोना महामारी के बाद FIIs ने भारतीय बाजार में जमकर खरीदारी की। इसके चलते भारतीय बाजार में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई और महीने दर महीने नए रिकॉर्ड बनते गए। हालांकि, यह दौर 2025 आते-आते खत्म हो गया। विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बिकवाली शुरू कर दी। इससे भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट आई। यह सिलसिला 2026 में भी खत्म नहीं हुआ। 2026 में अब तक FIIs की शुद्ध बिकवाली 1.91 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रही है। बिकवाली की इस रफ्तार को देखते हुए, ज्यादातर निवेशक परेशान हैं कि FIIs भारत में वापस कब आएंगे? अगर आप भी शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे होंगे। आइए आपको बताते हैं कि विदेशी निवेशक बाजार से क्यों पैसा निकाल रहे हैं और कब तक उनकी वापसी हो सकती है?
कब थमेगी बिकवाली?
विदेशी निवेशकों क्यों पैसा निकाल रहे?
स्टॉक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, भारतीय बाजार से विदेशी निवेशकों की पूंजी निकासी की मुख्य वजह AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) है। अभी दुनिया के बड़े निवेशकों का ध्यान AI के क्षेत्र में सफल होने वालों और असफल होने वालों पर टिका है। इन सब के बीच विदेशी निवेशकों का मानना है कि AI के मामले में भारत पिछड़ रहा है। इसलिए वो अपना पैसा निकाल कर दक्षिण कोरिया और ताइवान में लगा रहे हैं। दक्षिण कोरिया की दो कंपनियां – Samsung और SK Hynix और ताइवान की एक कंपनी – TSMC इन पैसों का सबसे बड़ा हिस्सा अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।
इस साल FPI प्रवाह में एक अहम रुझान यह है कि जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान में काफी निवेश आ रहा है, जबकि भारत से पैसा बाहर जा रहा है। इसके अलावा कमजोर रुपया और कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें भी बाजा के मूड को बेहतर बनाने में कोई मदद नहीं कर रही हैं।
कब लौटेंगे विदेशी निवेशक?
मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि गिरावट के बाद अब भारतीय बाजार के वैल्यूएशन ‘सही’ (fair) की ओर बढ़ रहे हैं। वैल्यूएशन, खासकर लार्ज कैप में, अब लंबे समय के औसत के करीब हैं। Nifty का ट्रेलिंग प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल 20x से नीचे गिर गया है। Q4FY26 के अनुमानों के आधार पर, यह पहले ही 19x से नीचे है, जो इसके लंबे समय के औसत 18.9x के आसपास है। ऐसे में अगर कंपनियां बेहतर रिजल्ट देना शुरू करती हैं तो विदेशी निवेशक एक बार फिर भारत की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि, अभी ईरान संकट, टूटता रुपया और कच्चे तेल की कीमत में उछाल इसके राह में बड़ी बाधा हैं। इसलिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि FII कब वापसी करेंगे। ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में FII की वापसी कई कारकों पर निर्भर करेगी। इसमें स्थानीय और वैश्विक, दोनों पहलु शामिल होंगे।
