Antitrust Case, QuickCommerce Dispute: ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) से क्विक कॉमर्स कंपनियों ब्लिंकिट, ज़ेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। आरोप है कि ये कंपनियां गहरी छूट (डीप डिस्काउंट) और प्रिडेटरी प्राइसिंग जैसी प्रतिस्पर्धा विरोधी नीतियों को अपनाकर छोटे रिटेलर्स को नुकसान पहुंचा रही हैं।
क्विक कॉमर्स कंपनियों ब्लिंकिट, ज़ेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट के खिलाफ कार्रवाई की मांग।
2 लाख से ज्यादा किराना स्टोर्स बंद होने का आरोप
AICPDF ने शिकायत में दावा किया है कि इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की आक्रामक प्राइसिंग रणनीति के कारण 75-80 शहरों में 2 लाख से अधिक किराना स्टोर्स बंद हो गए हैं। शिकायत में एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों का तुलनात्मक अध्ययन भी पेश किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्विक कॉमर्स कंपनियां पारंपरिक दुकानों की तुलना में बहुत अधिक छूट दे रही हैं, जिससे असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
10% न्यूनतम छूट की मांग
AICPDF ने यह भी सुझाव दिया है कि एफएमसीजी उत्पादों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से न्यूनतम 10% छूट की सीमा निर्धारित की जाए। इसके अलावा, ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर छूट को नियंत्रित करने के लिए सख्त नियम लागू करने की भी मांग की गई है।
FMCG कंपनियां बदल रही हैं रणनीति
इस बीच, HUL, ITC, पारले प्रोडक्ट्स और अदानी विल्मर जैसी एफएमसीजी कंपनियां अपने चैनल स्ट्रैटेजी में बदलाव कर रही हैं। ये कंपनियां अब क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए विशेष पैकेजिंग और मूल्य निर्धारण कर रही हैं, जिससे पारंपरिक किराना स्टोर्स के साथ संतुलन बना रहे।
क्विक कॉमर्स का बढ़ता बाजार
मार्च 2024 में एक रिपोर्ट के अनुसार, क्विक कॉमर्स का कुल बाजार मूल्य $10 बिलियन तक पहुंच गया है, और 2032 तक $75 बिलियन को पार करने की संभावना है। विश्लेषकों का मानना है कि 80-90% क्विक कॉमर्स ऑर्डर किराने से जुड़े होते हैं, जिससे इनके प्लेटफॉर्म पर गेहूं का आटा, तेल और दालों पर भारी छूट देखने को मिलती है। हालांकि, IPO के बाद Zepto की छूट रणनीति धीमी हो सकती है, और अन्य कंपनियों पर भी लाभप्रदता का दबाव बढ़ने की उम्मीद है।
India's Competition Commission has found Zomato and Swiggy potentially breaching antitrust laws with exclusive restaurant deals.
कंपनियों ने नहीं दिया कोई बयान
ET की रिपोर्ट के अनुसार, ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट और ज़ेप्टो ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की। AICPDF अध्यक्ष धैर्यशील पाटिल ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
क्या होगा आगे?
CCI अब इस शिकायत की जांच करेगा और देखेगा कि क्या क्विक कॉमर्स कंपनियां वास्तव में प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकार इन प्लेटफॉर्म्स पर सख्त कार्रवाई कर सकती है।
