आमतौर पर जब हम किसी को अमीर या आर्थिक रूप से सफल मानते हैं, तो सबसे पहले हमारी नजर उसकी सैलरी या हर महीने होने वाली कमाई पर जाती है। हम सोचते हैं कि अगर कोई व्यक्ति महीने के दो या तीन लाख रुपये कमा रहा है, तो वह बेहद अमीर और सुरक्षित है। लेकिन फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की मानें तो यह सोच पूरी तरह सही नहीं है। आपकी असली आर्थिक ताकत या 'अमीरी' इस बात से नहीं मापी जाती कि आप हर महीने कितना कमाते हैं, बल्कि इस बात से तय होती है कि आपकी 'नेट वर्थ' (Net Worth) कितनी है। कई बार भारी-भरकम सैलरी पाने वाले लोग भी गलत वित्तीय आदतों के कारण कर्ज के जाल में फंसे रहते हैं, जबकि कम सैलरी वाला इंसान सही प्लानिंग से अपनी नेट वर्थ को मजबूत कर लेता है। आइए जानते हैं नेटवर्थ क्या होती है, इसे कैसे कैलकुलेट करते हैं और यह आपकी सैलरी से ज्यादा महत्वपूर्ण क्यों है।
क्या है नेटवर्थ?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि 'नेट वर्थ' का असल मतलब क्या है? साधारण शब्दों में कहें तो, आज की तारीख में आपके पास जो कुछ भी है (आपकी संपत्ति) उसमें से अगर आपके ऊपर चल रहे कुल कर्ज को घटा दिया जाए, तो जो बची हुई रकम होगी, वही आपकी नेट वर्थ यानी आपकी 'कुल संपत्ति का असली मूल्य' है। इसे समझने का एक बहुत ही सरल फॉर्मूला है: नेट वर्थ = एसेट्स (Assets) - लायबिलिटीज (Liabilities)। आपके एसेट्स में वह सब कुछ आता है जिसे बेचकर पैसा कमाया जा सकता है, जैसे आपके बैंक अकाउंट में जमा कैश, फिक्स डिपॉजिट (FD), म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में किया गया निवेश, सोना-चांदी, और आपका अपना मकान या जमीन। वहीं दूसरी तरफ, लायबिलिटीज में आपके सभी प्रकार के कर्ज शामिल होते हैं, जैसे होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का बकाया बिल।
अमीरी सैलरी से क्यों नहीं मापी जाती है?
अब सवाल यह उठता है कि आपकी असली अमीरी सिर्फ आपकी सैलरी से क्यों नहीं नापी जा सकती? इसे एक दिलचस्प उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए दो दोस्त हैं अमित और राहुल। अमित की मासिक सैलरी ₹2 लाख है। वह एक महंगे इलाके में किराए के आलीशान फ्लैट में रहता है, महंगी कार चलाता है जिसकी भारी ईएमआई (EMI) जाती है, और उसके पास दो-तीन क्रेडिट कार्ड्स का बड़ा बकाया है। अमित की कमाई तो बहुत अच्छी है, लेकिन महीने के अंत में उसके पास निवेश के नाम पर कुछ नहीं बचता। दूसरी तरफ राहुल है, जिसकी सैलरी सिर्फ 80,000 है। वह एक सामान्य घर में रहता है, उसके ऊपर कोई कर्ज नहीं है, और वह हर महीने नियम से म्यूचुअल फंड (SIP) और पीपीएफ में निवेश करता है। अगर आज इन दोनों की नौकरी चली जाए, तो अमित तुरंत संकट में आ जाएगा क्योंकि उसके एसेट्स कम और कर्ज ज्यादा हैं (यानी उसकी नेट वर्थ नेगेटिव या बहुत कम है)। वहीं राहुल के पास अच्छा-खासा बैकअप और निवेश है, यानी उसकी नेट वर्थ अमित से कहीं बेहतर है। इस उदाहरण से साफ है कि ऊंची सैलरी आपको अमीर दिखा सकती है, लेकिन नेट वर्थ ही आपको वास्तव में अमीर बनाती है।
नेटवर्थ के लिए जरूर करें ये काम
अपनी फाइनेंशियल सेहत को सुधारने के लिए हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार अपनी नेट वर्थ को जरूर कैलकुलेट करना चाहिए। इसकी प्रक्रिया बेहद आसान है। एक कागज या एक्सेल शीट लें और उसे दो हिस्सों में बांट लें। एक तरफ अपने सारे 'एसेट्स' की आज की मार्केट वैल्यू लिखें (जैसे बैंक बैलेंस, पीपीएफ, गोल्ड, और घर की मौजूदा कीमत)। दूसरी तरफ अपनी सारी 'लायबिलिटीज' यानी कर्जों की कुल बकाया राशि लिख लें। अब कुल एसेट्स में से कुल लायबिलिटीज को घटा दें। जो आंकड़ा आपके सामने आएगा, वही आपकी नेटवर्थ है। अगर यह आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि आप आर्थिक रूप से सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन अगर यह माइनस में है या स्थिर है, तो आपको तुरंत अपने खर्चों और वित्तीय आदतों को बदलने की जरूरत है।
नेटवर्थ कैसे बढ़ानी है?
अगर आपकी नेट वर्थ कम है, तो इसे बढ़ाने के तरीके क्या हैं? नेट वर्थ बढ़ाने के दो ही मुख्य रास्ते हैं या तो अपने एसेट्स (निवेश) को बढ़ाएं या अपनी लायबिलिटीज (कर्ज) को घटाएं। सबसे पहले अपने महंगे पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड के कर्ज को जल्द से जल्द चुकाने की कोशिश करें, क्योंकि इनका भारी ब्याज आपकी नेट वर्थ को खा जाता है। इसके बाद, अपनी सैलरी का एक निश्चित हिस्सा फिजूलखर्ची में उड़ाने के बजाय उत्पादक संपत्तियों (Productive Assets) जैसे म्यूचुअल फंड, इक्विटी या रियल एस्टेट में निवेश करना शुरू करें।
