What Is MF LITE: कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने पैसिव म्यूचुअल फंड स्कीमों के लिए उदार म्यूचुअल फंड लाइट (एमएफ लाइट) फ्रेमवर्क लॉन्च करने को मंजूरी दे दी। एमएफ लाइट फ्रेमवर्क के तहत, सेबी ने स्पॉन्सर्स के लिए एलिजिबिलिटी नियमों से संबंधित आवश्यकताओं में ढील दी है। इनमें नेटवर्थ, ट्रैक रिकॉर्ड और प्रॉफिटैबिलिटी, ट्रस्टियों की जिम्मेदारी, अप्रूवल प्रोसेस और डिस्क्लोजर यानी खुलासे शामिल हैं।
एमएफ लाइट क्या है?
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क्या है म्यूचुअल फंड लाइट का मकसद
म्यूचुअल फंड लाइट का मकसद म्यचूअल फंड इंडस्ट्री में नयी एंटिटी (कंपनी) को आसान बनाना, नई कंपनियों को प्रोत्साहित करना, नियमों की जिम्मेदारी कम करना, निवेश बढ़ाना, मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ाना, इंवेस्टमें डायवर्सिफिकेशन को सुविधाजनक बनाना और इनोवेशन को बढ़ावा देना है।
किसे मिलेगा फायदा
म्यूचुअल फंड लाइट का फायदा उन नई म्यूचुअल फंड कंपनियों को मिलेगा, जो पैसिव स्कीम पेश करेंगी, क्योंकि उनके लिए नियम आसान किए जाएंगे। निवेशकों को इसलिए फायदा होगा कि उन्हें निवेश के नए और अधिक अवसर मिलेंगे।
और क्या मिलेगी सुविधा
मौजूदा एएमसी (एसेट मैनेजमंट कंपनी या म्यूचुअल फंड कंपनी), जिनके पास एक्टिव और पैसिव दोनों स्कीम हैं, के पास अपनी-अपनी पैसिव स्कीमों को, यदि वे चाहें तो, किसी अलग ग्रुप एंटिटी में अलग करने का विकल्प मिलेगा। इसके नतीजे में एक ही स्पॉन्सर के तहत अलग-अलग एएमसी द्वारा एक्टिव और पैसिव स्कीमों को मैनेज किया जा सकेगा।
यदि वे मौजूदा एएमसी में पैसिव स्कीमों को जारी रखने का विकल्प चुनते हैं, तो सूचकांकों पर आधारित पैसिव योजनाओं के लिए सामान्य खुलासे और अन्य रेगुलेटरी जरूरतों, जो एमएफ लाइट फ्रेमवर्क के तहत कवर की जाएंगी, उन पर भी लागू होंगी।
