Mutual Fund Exit Load: अकसर म्यूचुअल फंड निवेशकों को एग्जिट लोड की जानकारी नहीं होती। ये एक तरह का चार्ज होता है। एग्जिट लोड म्यूचुअल फंड द्वारा तब लगाया जाता है जब कोई निवेशक एक निश्चित अवधि पूरी होने से पहले अपनी म्यूचुअल फंड यूनिट बेचता या रिडीम करता है। यह आमतौर पर निवेशकों द्वारा रखी गई म्यूचुअल फंड यूनिट्स की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) का एक प्रतिशत होता है। जिन म्यूचुअल फंड में कोई लॉक-इन अवधि नहीं होती वे म्यूचुअल फंड एग्जिट लोड लेते हैं। इसलिए म्यूचुअल फंड चुनते समय उसके एक्सपेंस रेशियो के साथ-साथ एग्जिट लोड पर भी विचार करें।
म्यूचुअल फंड में क्या होता है एग्जिट लोड
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उदाहरण से समझिए
आम तौर पर म्यूचुअल फंड स्कीमों में लॉक-इन पीरियड नहीं होता। आप ऐसी स्कीमों से जब मर्जी पैसा निकाल सकते हैं। मगर ऐसे फंड एक अवधि तय कर देते हैं कि यदि आपने इस अवधि से पहले म्यूचुअल फंड यूनिट बेची या रिडीम कीं, तो आपको एग्जिट लोड का भुगतान करना होगा।
सभी फंड एग्जिट चार्ज नहीं लगाते हैं। इसलिए निवेश करते समय ऐसे प्लान चुनना ज्यादा बेहतर है जिनमें एग्जिट लोड नहीं होता।
कितना लगता है चार्ज
आम तौर पर म्यूचुअल फंड एक साल का समय तय करते हैं और इससे पहले पैसा निकालने पर चार्ज लगाते हैं। वहीं अधिकतर स्कीमों में एग्जिट लोड 1 फीसदी होता है। कुछ म्यूचुअल फंड योजनाओं के नियमों और शर्तों के आधार पर एक वर्ष के बाद भी एग्जिट लोड लागू हो सकता है।
1 फीसदी चार्ज का गणित समझिए
एग्जिट लोड आमतौर पर निवेशकों की म्यूचुअल फंड यूनिट्स की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) का एक प्रतिशत होता है। यदि आप तय समय से पहले म्यूचुअल फंड यूनिट बेचते समय घाटे पर भी बेच रहे हैं तो भी आपको एग्जिट लोड का भुगतान करना होगा।
