US और ईरान के बीच फिर युद्ध शुरू होने से कच्चे तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। वहीं, दूसरी ओर, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के महत्वपूर्ण द्वीपों पर कब्जा कर लिया है और सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान करते हुए वहां के सैन्य व तेल ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं। इसके चलते सऊदी अरब को अपना तेल पाइप लाइन बंद करना पड़ा है। दुनिया के तेल बाजार के लिए यह होर्मुज से बड़ा संकट माना जा रहा है। इससे आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत तेजी से बढ़ने और महंगाई को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं। ऐसे में सबकी नजरें US फेडरल रिजर्व पर टिकी हैं, जो बुधवार, 16 सितंबर को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी और अपडेटेड इकोनॉमिक अनुमान (जिसमें 'फेड डॉट प्लॉट' भी शामिल है) की घोषणा करेगा।
जानकारों का कहना है कि US फेड का 16 सितंबर का फैसला सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि भारत के शेयर बाजार, सोना-चांदी और रुपये की दिशा के लिए भी अहम होगा। Fed का फैसला भारतीय समयानुसार रात करीब 11:30 बजे आएगा। आइ समझने की कोशिश करते हैं कि फेड के इस फैसले का सोने और चांदी की कीमत, भारतीय शेयर बाजार और रुपये पर क्या होगा?
Fed के फैसले पर क्यों टिकी दुनिया की नजरें?
अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों का इस्तेमाल महंगाई को नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने के लिए करता है। ब्याज दर बढ़ने पर कर्ज महंगा होता है और अर्थव्यवस्था में पैसे की रफ्तार कम होती है। वहीं, दरें घटने पर पैसा सस्ता होता है और निवेश व खपत को बढ़ावा मिल सकता है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, महंगाई के आंकड़ों और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने Fed के सामने मुश्किल बढ़ा दी है।
क्यों ब्याज दर बढ़ाने की संभावना?
ईरान के साथ युद्ध से अमेरिका में महंगाई बढ़ी है। अगस्त के लिए US CPI में सालाना आधार पर 3.4% और महीने-दर-महीने आधार पर 0.3% की बढ़ोतरी हुई। डीजल के दाम रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने से सभी जरूरी सामान के दाम बढ़े हैं। यूएस में महंगाई बढ़ने की वजह से, ऐसी उम्मीद है कि US फेडरल रिजर्व बुधवार को ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करेगा। सबसे बुरी बात यह है कि US और ईरान के बीच चल रहे टकराव के कारण ऊर्जा की कीमतें ज्यादा रहने से, निकट भविष्य में भी महंगाई के ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंका है।
महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी
अपनी पिछली पॉलिसी मीटिंग में, US के सेंट्रल बैंक ने लगातार पांचवीं बार बेंचमार्क दरों को 3.5% और 3.75% की टारगेट रेंज में बिना किसी बदलाव के बनाए रखा। हालांकि, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के 12 सदस्यों में से तीन ने जुलाई की मीटिंग में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के पक्ष में वोट दिया, जिससे पता चलता है कि पॉलिसी बनाने वालों के बीच महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है। सितंबर 2016 के बाद यह पहली बार था जब तीन पॉलिसी बनाने वालों ने ब्याज दरों की दिशा के बारे में आम राय से अलग अपनी असहमति जताई।
फेड के ब्याज दर में बढ़ोतरी संभव
सोना-चांदी की कीमत में आ सकती है गिरावट
फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ने से डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को मजबूती मिल सकती है। ऐसे माहौल में सोने-चांदी जैसे निवेश, जिन पर नियमित ब्याज नहीं मिलता, निवेशकों को कम आकर्षक लग सकते हैं। यानी सोने और चांदी की कीमत में गिरावट आ सकती है। हालांकि, मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की मांग सोने को सहारा दे सकती है।
शेयर बाजार में आ सकती है तेज हलचल
फेड के ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर ग्लोबल इक्विटी मार्केट पर पड़ सकता है। जब अमेरिका में बॉन्ड और डॉलर आकर्षक होते हैं तो विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों, जैसे भारत, में पैसा लगाना अपेक्षाकृत कम आकर्षक हो सकता है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। खासकर ऐसे सेक्टर जिनमें वैल्यूएशन ऊंचा है, उनमें मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
रुपये पर क्या होगा असर?
भारतीय रुपये के लिए Fed का फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। अभी रुपये पर पहले से ही कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का दबाव है। अगर Fed दर बढ़ाता है और डॉलर मजबूत होता है, तो रुपये पर और दबाव आ सकता है। लेकिन यहां भी सिर्फ Fed ही कहानी तय नहीं करेगा। कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेश और भारत का व्यापार घाटा भी रुपये की दिशा तय करेंगे।
